गुरुवार, 21 अप्रैल, 2005 को 16:40 GMT तक के समाचार
ओलंपिक खेलों में 1928 में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के सदस्य रहे सौ वर्षीय फ़िरोज़ ख़ान का निधन हो गया है.
जानकारों के अनुसार वे पिछले साल नौ सितंबर को सौ वर्ष के हुए थे.
अब उस दौर के कोई भी ओलंपिक खिलाड़ी जीवित नहीं हैं.
स्वतंत्रता से पहले एम्सटर्डेम में 1928 में हुए ओलंपिक खेलों में वे तब की भारतीय हॉकी टीम के लिए राईट-इन के स्थान पर खेले थे.
ये टीम स्वर्ण पदक जीतकर भारत लौटी थी.
उन्हें सदा ये शिकायत रही कि हॉकी के जादूगर माने जाने वाले ध्यानचंद को सेंटर फ़ॉर्वर्ड के स्थान पर खिलाने के लिए उनका स्थान सेंटर फ़ॉर्वर्ड से बदल कर राईट-इन कर दिया जाता था.
लेकिन वे ये ज़रूर मानते थे कि ध्यानचंद विश्व स्तर के बेहतरीन हॉकी ख़िलाड़ियों में से एक थे.
आज़ादी के बाद वे पाकिस्तान में बस गए थे और कराची में ही उनका निधन हुआ.
पाकिस्तानी हॉकी टीम के पूर्व कप्तान इस्लाहुद्दीन का कहना था कि फ़िरोज़ ख़ान को हॉकी से इतना लगाव था कि इस उम्र में भी वे पाकिस्तानी टीम के प्रदर्शन पर नज़र रखते थे.
पिछले साल पाकिस्तान हॉकी फ़ेड्रेशन ने फ़िरोज़ ख़ान का 100वाँ जन्मदिन मनाने के लिए भारत-पाकिस्तान हॉकी सीरीज़ का पहला मैच उनको समर्पित किया था.