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बुधवार, 16 मार्च, 2005 को 14:21 GMT तक के समाचार

मानक गुप्ता
इडन गार्डन्स, कोलकाता से

सचिन के नाम एक और कीर्तिमान

भारत के सचिन तेंदुलकर टेस्ट मैचों में 10,000 रन बनाने वाले दुनिया के पाँचवें बल्लेबाज़ बन गए हैं.

कोलकाता में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ आज शुरु हुए दूसरे टेस्ट में सचिन ने ये मुक़ाम हासिल किया.

कोलकाता का ईडन गार्डन्स मैदान क्रिकेट प्रेमियों के शोर से गूँज उठा जब सचिन तेंदुलकर 27 रनों पर पहुँचे.

क्योंकि इस 27वें रन के साथ ही वो एलन बॉर्डर, सुनील गावस्कर, स्टीव वॉ, और ब्रायन लारा के बाद टेस्ट मैचों में 10,000 रन पूरे करने वाले पाँचवें बल्लेबाज़ बन गए.

सचिन के अंदाज़
सचिन का करियर तस्वीरों में

ये सचिन का 122वाँ टेस्ट था, उन्होंने 195 पारियाँ खेली हैं और क़रीब 57 रन औसत से खेलते हुए 10,000 रनों का ये आँकड़ा पार किया है.

सचिन इस रिकॉर्ड तक पहुँचने को कितने बेताब थे, ये इसी बात से साफ़ हो जाता है कि उन्होंने अपना खाता भी 18 गेंदों का सामना करने के बाद खोला.

आसान नहीं

इस उपलब्धि के बाद सचिन ने कहा, “टेस्ट मैचों में 10 हज़ार रन बनाना कोई आसान काम नहीं है और इसमें कई लोगों का योगदान है जैसे मेरे माँ-बाप, मेरे भाई-बहन, मेरी पत्नी, कोच और साथी खिलाड़ी. इन सबकी मदद के बिना ये संभव नहीं था.”

संभल-संभल कर खेलते हुए सचिन ने टेस्ट मैचों में अपना 40वाँ अर्द्धशतक भी पूरा किया.

उनके पास मौक़ा तो दुनिया में सबसे ज़्यादा शतक का रिकॉर्ड बनाने का भी था लेकिन वो 52 रन बनाकर शाहिद आफ़रीदी की गेंद पर आउट होकर पैवेलियन लौट गए और 34 शतकों के गावस्कर के रिकॉर्ड से आगे नहीं निकल पाए.

इसी इसी तरह वो मोहाली टेस्ट में भी 94 रन पर आउट हो गए थे.

उनसे पूछा गया कि क्या अब शतक वाले गावस्कर के रिकॉर्ड को तोड़ने की भी बेसब्री है, तो चुटकी लेते हुए वो बोले, मुझे लगता है कि बेसब्री तो आप को हो रही है.

मैं तो बस बल्लेबाज़ी करने जाता हूँ. रिकॉर्ड्स के बारे में नहीं सोचता.

द्रविड़ ने बॉर्डर, गावस्कर, लारा और वॉ के साथ सचिन का नाम जुड़ने पर कहा कि ये सभी महान हैं और इनकी तुलना आपस में नहीं की जा सकती.

वो बोले, “अगर इन सबने टेस्ट मैचों में 10 हज़ार रन बनाए हैं तो इसका मतलब यही हुआ कि सभी महान हैं, इनकी तुलना करना ठीक नहीं होगा.

दस हज़ार रन के इस रिकॉर्ड के बावजूद बहुत से क्रिकेट प्रेमी सचिन के बदले हुए अंदाज़ यानी उनकी धीमी बल्लेबाज़ी से निराश नज़र आए.

कुछ का मानना है कि सचिन में अब वो पहले वाली बात नहीं रही जबकि कुछ कहते हैं कि वो अब टीम के वरिष्ठ खिलाड़ी की तरह सोचने लगे हैं.

ख़ुद सचिन के दीवानों का भी मानना है कि अब तो सहवाग को खेलते देखना ज़्यादा अच्छा लगता है.