रविवार, 05 दिसंबर, 2004 को 09:23 GMT तक के समाचार
अपूर्व कृष्ण
चैंपियंस ट्रॉफ़ी हॉकी की एक प्रतिष्ठत प्रतियोगिता है जो हर साल होती है.
इसमें दुनिया के हॉकी खेलनेवाले छह बेहतरीन देश हिस्सा लेते हैं.
चैंपियंस ट्रॉफ़ी की नींव पड़ी पाकिस्तान में और प्रतियोगिता को लंबे समय तक पाकिस्तान हॉकी संघ के प्रमुख रहे एयर मार्शल नूर ख़ान के दिमाग़ की उपज माना जाता है.
शुरूआत
एयर मार्शल नूर ख़ान ने 1978 में अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में हो रहे विश्व कप के दौरान चैंपियंस ट्रॉफ़ी का ख़याल सामने रखा.
उनकी कोशिश कामयाब हुई और 1978 में ही 17 से 24 नवंबर तक लाहौर में पहली चैंपियंस ट्रॉफ़ी प्रतियोगिता का आयोजन हुआ.
1987 में पहली बार महिलाओं के लिए भी चैंपियंस ट्रॉफ़ी शुरू की गई.
पाकिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर पहली चैंपियंस ट्रॉफ़ी पर क़ब्ज़ा किया.
भारत पहली चैंपियंस ट्रॉफ़ी में नहीं खेला था.
भारत पहली बार 1980 की दूसरी चैंपियंस ट्रॉफ़ी में खेला.
लाहौर में हुई ये प्रतियोगिता भी पाकिस्तान ने ही जीती और भारत पाँचवें नंबर पर रहा.
चैंपियंस ट्रॉफ़ी के 24 साल के इतिहास में बस चार देश इस प्रतियोगिता को जीत पाए हैं.
जर्मनी ने आठ बार, ऑस्ट्रेलिया ने सात, हॉलैंड ने सात और पाकिस्तान ने तीन बार ये प्रतियोगिता जीती है.
भारत अभी तक नौ बार चैंपियंस ट्रॉफ़ी में खेला है मगर यह ट्रॉफ़ी वह एक बार भी नहीं जीत पाया है.
भारतीय खिलाड़ियों का सबसे अच्छा प्रदर्शन चौथी चैंपियंस ट्रॉफ़ी में रहा जब हॉलैंड के शहर एम्सटल्वीन में भारत तीसरे नंबर पर रहा था.
टीमों का चयन
वर्तमान चैंपियंस ट्रॉफ़ी में छह टीमें खेलती हैं.
मगर पहली चैंपियंस ट्रॉफ़ी में पाँच टीमें और दूसरी में सात टीमें खेली थीं.
वर्तमान समय में छह टीमों के चयन की एक निश्चित प्रक्रिया है.
जिस वर्ष ओलंपिक या विश्व कप हॉकी होती है उसके अगले वर्ष चैंपियंस ट्रॉफ़ी की जिन छह टीमों का चयन होता है उनमें एक तो वह देश होता है जहाँ प्रतियोगिता का आयोजन होता है.
मेज़बान के अलावा पिछले वर्ष के विजेता, विश्व कप विजेता और फिर ओलंपिक या विश्व कप में से जो भी चैंपियंस ट्रॉफ़ी के नज़दीक हो, उसकी शीर्ष टीमों में से ऊपर की टीमों को स्थान दिया जाता है.
प्रतियोगिता में अंतिम स्थान पर रही टीम अगली प्रतियोगिता से बाहर हो जाती है.
इस टीम की जगह चैंपियंस चैलेंज नाम की एक अन्य प्रतियोगिता के विजेता को जगह दी जाती है.