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बुधवार, 29 सितंबर, 2004 को 14:22 GMT तक के समाचार

बीसीसीआई अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे प्रभावी और धनी संस्था के अध्यक्ष पद के लिए मारामारी ही यह साबित करती है कि यह पद कितना मायने रखता है.

अध्यक्ष पद की चुनावी प्रक्रिया में 30 सदस्य शामिल होते हैं. इनमें से 26 मान्यता प्राप्त राज्य क्रिकेट एसोसिएशन का मत होता है.

तीन मत केंद्र सरकार के हाथ में है. ये हैं यूनिवर्सिटिज, रेलवे और सर्विसेज.

यूनिवर्सिटिज़ मानव संसाधन मंत्रालय से, रेलवे रेल मंत्रालय से और सर्विसेज़ रक्षा मंत्रालय से जुड़ा होता है.

30 वाँ मत होता है क्रिकेट क्लब ऑफ़ इंडिया का. जिसकी अध्यक्षता इस समय राजसिंह डुंगरपुर कर रहे हैं. अध्यक्ष पद मिलने में क्षेत्रीय संतुलन बना रहे इसके लिए हर क्षेत्र को मौक़ा दिया जाता है.

चुनाव

अध्यक्ष का चुनाव रोटेशन के आधार पर होता है. इसके लिए देश को पाँच ज़ोन में बाँटा गया है.

इस बार उत्तरी क्षेत्र का मौक़ा था, जहाँ से डालमिया समर्थकों के उम्मीदवार रणबीर सिंह मैदान में हैं लेकिन पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन ने अपनी ओर से शरद पवार को नामांकित किया है.

वैसे इसकी शुरुआत 1993 में माधवराव सिंधिया के ज़माने से हुई थी जब वे ख़ुद तो सेंट्रल ज़ोन से थे लेकिन उन्होंने हरियाणा क्रिकेट एसोसिएशन से नामांकन लेकर चुनाव लड़ा.

आईएस बिंद्रा भी उत्तरी ज़ोन के प्रतिनिधि थे लेकिन दक्षिणी ज़ोन की बारी के समय वे चुनाव में उतरे.

चुनाव के समय बीसीसीआई अध्यक्ष को असीमित अधिकार होते हैं. क्योंकि अध्यक्ष किसी तरह की गड़बड़ी बता कर किसी भी राज्य एसोसिएशन के अध्यक्ष को वोट देने से रोक सकता है.

कमाई

बीसीसीआई की कमाई का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि क्रिकेट के प्रसारण अधिकारी से ही उसकी कमाई 400 फ़ीसदी बढ़ने का अनुमान ख़ुद डालमिया ने व्यक्त किया था.

बीसीसीआई को दक्षिण एशिया की सबसे धनी खेल संस्था माना जाता है.

डालमिया का ख़ुद कहना था कि इस साल दिए जाने वाले प्रसारण अधिकार से कमाई एक हज़ार करोड़ तक हो सकती है.

लेकिन पारदर्शिता का आलम यह है कि न बीसीसीआई का आधिकारिक दफ़्तर है और न उसकी वेबसाइट ही.

देश की इतने लोकप्रिय खेल संस्था का अध्यक्ष कभी भी कोई प्रमुख खिलाड़ी नहीं रहा. राजा-महाराजाओं से शुरू हुए इस खेल पर उद्योगपतियों और राजनेताओं का ही क़ब्ज़ा बना रहा है.

उनके अलावा अध्यक्ष पद पर रहे प्रमुख नाम हैं, माधव राव सिंधिया, राज सिंह डुंगरपुर, आईएस बिंद्रा, एसी मुतैया और डालमिया.