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मंगलवार, 31 अगस्त, 2004 को 07:21 GMT तक के समाचार

सलीम रिज़वी
न्यूयॉर्क से

यूएस ओपन की भारतीय अंपायर

पचीस वर्ष की रीतू सेठी शर्मा पहली भारतीय महिला हैं जिन्हें यूएस ओपन टेनिस प्रतियोगिता में अंपायरिंग करने के लिए चुना गया है.

सोमवार को शुरू हुए यूएस ओपन में रीतू ने पहली बार अंपायरिंग की.

यूएस ओपन के पहले दिन, कोर्ट नंबर तेरह में कई मैचों की अंपायरिंग करने के साथ रीतू शर्मा ने महेश भूपति के डबल्स के साथी मेक्स मिर्नी के एकल मैच की भी लाइन अम्पायर की हैसियत से देख-रेख की.

इससे पहले ग्रैंड स्लैम मैचों में रीतू ऑस्ट्रेलियन ओपन और विम्बलडन में अंपायरिंग कर चुकी हैं.

रीतू कहती हैं कि यूएस ओपन जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में अंपायरिंग करने के लिए चुने जाने से उनका सपना पूरा हुआ है, “मैंने यही सपना देखा था कि मैं भी टेनिस के ग्रैंड स्लैम मैचों में खेलूँ लेकिन वह नहीं हो सका तो अंपायरिंग के ज़रिए ही मैंने अपनी मनोकामना पूरी की. मैं यहाँ यूएस ओपन में अंपायरिंग करके बहुत खुश हूँ.”

रीतू बचपन से ही टेनिस की दीवानी थीं और भारत में जूनियर टेनिस में 1995 से 1998 के बीच अंडर-16 वर्ग में पहली वरीयता हासिल की थी. लेकिन प्रायोजक नहीं मिलने के कारण उन्हें टेनिस को एक खिलाड़ी के रूप में अलविदा कहना पड़ा.

शुरूआत

रीतू को 1500 उम्मीदवारों में से चुना गया था. टेनिस के एक मध्य स्तर के अम्पायर के रूप में उन्होंने यूएस ओपन में अंपायरिंग की शुरूआत की, इसे व्हाइट बैज कहा जाता है.

वे बताती हैं कि अंपायर बनने के लिए भी काफ़ी मेहनत करनी पड़ती है.

रीतू कहती हैं, “यूएस ओपन में अंपायरिंग करने के लिए मुझे बहुत पढ़ाई करनी पड़ी. एटीपी और डब्लूटीए के टेनिस के सारे नियम-क़ानून को समझना पड़ा. इसके अलावा मैचों के दौरान विवादों को सुलझाने का हुनर भी सीखना पड़ा जिससे खेल को सुचारू रूप से चलाया जा सके.”

भारत में महाराष्ट्र में कुछ दिन अंपायरिंग करने के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शुरूआत की.

सन 2001 में उन्होंने अमरीका में अंपायरिंग की परीक्षा पास की. उसके बाद कई प्रतियोगिताओं में अंपायरिंग करने के लिए वह दुनिया भर में घूमीं.

लेकिन यूएस ओपन में चुने जाने के बाद अब उन्हें इंतज़ार है कि फ्रेंच ओपन में भी अंपायरिंग करने का मौक़ा मिले.

अब उनको चेयर अंपायरिंग के लिए भी चुना जा सकता है. और शायद यह भी जल्दी ही हो जाए. वह कहती हैं, “चेयर अंपायरिंग के लिए मुझे इस टूर्नामेंट में भी मौक़ा मिल सकता है.”

आस्ट्रेलियन ओपन में वे चेयर अंपायरिंग कर चुकी हैं.

रीतू कहती हैं कि "अमरीका में लोगों को इस बात पर बहुत हैरत होती है कि वह महिला होकर भारत में इतनी अच्छी अंपायरिंग कैसे सीख गईं."

रीतू कहती हैं कि भारत में टेनिस के शौक़ीन लोग अब अंपायरिंग में भी आने की कोशिश कर रहे हैं. “हमारे पास भारत में कुछ सालों में बहुत से अंपायर होंगे.”

उनका मानना है कि अगर अच्छा टेनिस खिलाड़ी नहीं बन सकते तो टेनिस के अच्छे अंपायर बनकर दुनिया में नाम कमाएँ.