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रविवार, 13 जून, 2004 को 02:16 GMT तक के समाचार

आदमी ने घोड़े को पछाड़ा

ब्रिटेन में घोड़े और आदमी की एक वास्तविक दौड़ में बाज़ी एक आदमी ने मारी है.

और अहम बात ये है कि हर साल होने वाली इस दौड़ में पिछले 24 साल से घोड़े ही जीतते आ रहे थे.

इस बार सिल्वर जुबली दौड़ में घोड़ों को हरा कर मानव जाति का नाम रौशन करने वाले व्यक्ति हैं- 27 वर्षीय हुव लॉब.

लॉब ने आम लोगों का सिर गर्व से ऊँचा तो किया ही, उन्होंने 25 हज़ार पाउंड यानी क़रीब 20 लाख रुपए के पुरस्कार पर भी हाथ साफ़ किया.

यह ब्रिटेन में एथलेटिक्स की दुनिया का सबसे बड़ा पुरस्कार बन चुका था.

दरअसल इस दौड़ में हर बार आदमी हार रहा था और पुरस्कार राशि में हर साल एक हज़ार पाउंड की बढ़ोत्तरी हो रही थी.

लॉब ने शनिवार को वेल्श में 22 मील की ऐतिहासिक दौड़ दो घंटे पाँच मिनट और 19 सेकेंड में पूरी की.

दौड़ पूरी करने वाले घोड़े में अव्वल रहा केबीजे, जिसकी सवारी ज़ो व्हाइट कर रहे थे. केबीजे ने यह दौड़ पूरी करने में दो घंटे सात मिनट 36 सेकेंड का समय लिया.

इतिहास बना

लॉब पहली बार प्रतियोगिता में भाग ले रहे थे, हालाँकि वह हैं एक पहुँचे हुए मैराथन धावक.

उन्होंने न सिर्फ़ कई घोड़ों को मात दी, बल्कि साथ दौड़ रहे क़रीब 500 मनुष्यों को भी पीछे छोड़ा.

लॉब ने बताया, "बड़ी विचित्र दौड़ थी. मेरे लिए सिर्फ़ एक मील दौड़ना बाक़ी बचा था जब मैंने खेत में एक घोड़े को देखा. मैं यह तय नहीं कर पाया कि यह ऐसे ही कोई घोड़ा है या दौड़ में भाग ले रहा कोई प्रतिद्वन्द्वी घोड़ा. मुझे लगा कि मैं तो बस गया."

उन्होंने कहा, "दौड़ जीतना बड़ा ही सुखद अनुभव है. घोड़े के ख़िलाफ़ दौड़ते हुए आपको पता नहीं होता कि उसे कैसे पीछे छोड़ा जाए."

और यह आम मैराथन जैसी सपाट सतह पर होने वाली दौड़ भी नहीं थी, बल्कि कहीं अच्छी सड़क थी तो कहीं पथरीला रास्ता, कहीं बड़ी-बड़ी घास तो कहीं कीचड़.

लॉब ने कहा, "रात में मैं दुआ माँग रहा था कि बारिश हो जाए. फिसलन वाले रास्ते पर घोड़े और आदमी दोनों को मुश्किलें आती हैं, लेकिन आदमी कहीं आसानी से सँभल जाता है."