श्रीलंका के ऑफ़ स्पिनर मुथैया मुरलीधरन ने टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज़्यादा विकेट लेने का गौरव हासिल करने के बाद अपनी उपलब्धि को अपने माता-पिता के नाम किया है.
हरारे में ज़िम्बाब्वे के साथ पहले टेस्ट मैच में मुरली ने अपना 520वां विकेट लेकर वेस्टइंडीज़ के कर्टनी वॉल्श के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया.
मैच के बाद भावुक हो उठे मुरली ने कहा,"मेरे खेल जीवन के उतार-चढ़ाव के समय मेरे माता-पिता ने मेरे लिए काफ़ी कुछ किया है".
उन्होंने कहा,"जब मैं छोटा था तभी से वे मुझे प्रोत्साहित करते रहे और मुझे आर्थिक रूप से भी सहायता दी".
देश के लिए ख़ास
मुरली ने कहा कि विश्व रिकॉर्ड का उनके और उनके देश के लिए एक अलग ही महत्व है.
उन्होंने कहा,"हम भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की तुलना में बहुत छोटे देश हैं और ऐसे प्रदर्शनों से दुनिया भर में श्रीलंका की एक अच्छी छवि जाती है".
उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसे प्रदर्शन से श्रीलंका में बहुत सारे युवा क्रिकेट खेलने के लिए आगे आएँगे.
रनतुंगा का स्थान
![]() अर्जुन रनतुंगा को याद किया मुरली ने |
मुरली मानते हैं कि पूर्व कप्तान अर्जुन रनतुंगा ने उनके खेल जीवन पर सबसे अधिक प्रभाव डाला.
उन्होंने कहा कि रनतुंगा ने आठ साल तक उनका मार्गदर्शन किया और दो बार उनके एक्शन को लेकर मचे विवाद के समय रनतुंगा हमेशा उनके साथ रहे.
मुरलीधरन का कहना था,"दूसरे लोगों ने भी मेरे लिए काफ़ी कुछ किया मगर रनतुंगा का मेरे लिए एक अलग स्थान है".
मुरली 1998 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ ओवल में खेले गए टेस्ट मैच को अपना सर्वेश्रेष्ठ मैच मानते हैं जिसमें उन्होंने 221 रन देकर 16 विकेट लिए थे.
वॉल्श का फ़ोन
हरारे मैच के समाप्त होने के बाद कर्टनी वॉल्श ने मुरलीधरन को फ़ोन कर बधाई दी और उनके स्वर में कोई निराशा नहीं थी.
मुरली ने बताया,"उन्होंने पहले भी मुझे फ़ोन किया था. कीर्तिमान तो बनते ही हैं टूटने के लिए. कोई मेरा भी रिकॉर्ड तोड़ेगा ही".
मुरली ने ऑस्ट्रेलियाई स्पिनर शेन वॉर्न की चर्चा करते हुए कहा कि वॉर्न उनका रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं.
उन्होंने कहा,"वॉर्न मेरा रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं और हो सकता है कि इसके बाद फिर मैं उन्हें पीछे छोड़ दूं".
शेन वॉर्न विकेट के मामले में मुरलीधरन से बस चार विकेट पीछे हैं.