पाकिस्तान के ख़िलाफ़ जारी रावलपिंडी टेस्ट में एक बार फिर राहुल द्रविड़ ने साबित कर दिया की उन्हें मिस्टर भरोसेमंद क्यों कहा जाता है.
निर्णायक टेस्ट में भारत की पारी की शुरुआत काफ़ी ख़राब रही और पहली ही गेंद पर वीरेंदर सहवाग जैसा बल्लेबाज़ चलता बना.
लेकिन फिर राहुल द्रविड़ का वह अंदाज़ देखने को मिला जिसके लिए वे मशहूर हैं.
वह भी ऐसे मौक़े पर जब भारतीय टीम को वाकई किसी की मज़बूत पारी की ज़रूरत थी.
ऐसा पहली बार नहीं है कि द्रविड़ भारतीय पारी के लिए संकट मोचक बने हैं. ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ उनकी और वीवीएस लक्ष्मण के बीच हुई ज़बरदस्त साझेदारी कौन भूल सकता है.
पिछले साल जब एडिलेड में भारत ने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक जीत दर्ज की तब भी द्रविड़ का बल्ला चला.
द्रविड़ ने ऑस्ट्रेलिया की तेज़ पिच पर 233 रनों की शानदार पारी खेली और भारत को ऐसी जीत दिलाई जो निकट भविष्य में तो भूला नहीं जा सकता.
बेहतरीन प्रदर्शन
अब द्रविड़ ने 233 रनों का आँकड़ा भी पार कर लिया है. रावलपिंडी टेस्ट में आउट होने से पहले उन्होंने 270 रनों की पारी खेली.
![]() रावलपिंडी में द्रविड़ ने 270 रनों की पारी खेली |
जो उनके टेस्ट करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी है. इसे लेकर द्रविड़ अभी तक पाँच दोहरा शतक लगा चुके हैं.
जो उनके विकेट पर टिके रहने का सबूत है. द्रविड़ की शानदार पारी अपनी धरती यानी सिर्फ़ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी चलती है.
इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके 17 टेस्ट शतक में से 11 विदेशी ज़मीन पर बने हैं.
भारत की मज़बूत बल्लेबाज़ी क्रम में राहुल द्रविड़ का स्थान ऐसा है जिस पर सबसे ज़्यादा भरोसा किया जा सकता है.
मज़बूत कड़ी
सचिन तेंदुलकर, वीरेंदर सहवाग, वीवीएस लक्ष्मण, सौरभ गांगुली के साथ राहुल द्रविड़ की मौजूदगी भारतीय क्रिकेट का सबसे मज़बूत पक्ष है.
![]() द्रविड़ भारतीय बल्लेबाज़ी की मज़बूत कड़ी है |
विकेट पर टिकने की कला के साथ द्रविड़ ने एक दिवसीय मार्का क्रिकेट में भी समय के साथ महारत हासिल की.
और आज के दिन तो विकेट कीपर के रूप में वे सफल माने जा रहे हैं. एक दिवसीय क्रिकेट में द्रविड़ का इस्तेमाल अनोखा उदाहरण है.
लेकिन द्रविड़ ने अपने को इस रूप में भी साबित किया है. द्रविड़ का बल्ला जिस अंदाज़ में टेस्ट और वनडे दोनों क्रिकेट में बोल रहा है उसी से टीम में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका का एहसास हो जाता है.