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क्रिकेट छोड़ने के लिए तैयार थे अफ़रीदी

रावलपिंडी के दूसरे एक दिवसीय मैच में पाकिस्तान की जीत में प्रमुख भूमिका निभाने वाले सलामी बल्लेबाज़ शाहिद अफ़रीदी का कहना है कि वे पिछले साल क्रिकेट छोड़ने का मन बना चुके थे.

अफ़रीदी ने कहा कि क्रिकेट प्रशंसकों के कारण ही उन्होंने अपना मन बदला.

पिछले साल विश्व कप में पाकिस्तान टीम के ख़राब प्रदर्शन के बाद अफ़रीदी को टीम में शामिल नहीं किया गया था.

लेकिन भारत के ख़िलाफ़ प्रतिष्ठित सिरीज़ में उनकी वापसी हुई और उन्होंने दूसरे वनडे में अपनी विस्फोटक बल्लेबाज़ी का प्रदर्शन कर जता दिया कि अभी उनमें बहुत कुछ क्रिकेट बाक़ी है.

अफ़रीदी ने इस मैच में सिर्फ़ 58 गेंद पर 80 रनों की बेजोड़ पारी खेली थी.

हालाँकि इस दौरान अफ़रीदी को पाकिस्तान ए टीम की कमान ज़रूर सौंपी गई और उन्होंने भारत का दौरा भी किया.

इस दौरे पर भी अफ़रीदी को क्रिकेट प्रशंसकों ने राष्ट्रीय टीम में लौटने के लिए संघर्ष जारी रखने की अपील की.

अफ़रीदी को सब कुछ याद है, "पाकिस्तान ए टीम के कप्तान के रूप में मैं भारत गया था. वहाँ भी लोगों ने मुझसे अपील की कि मुझे राष्ट्रीय टीम में वापसी की कोशिश जारी रखनी चाहिए. मेरे लिए ये बहुत भावुक क्षण था."

अफ़रीदी ने कहा कि अगर वे इसी तरह अच्छा स्कोर करते रहें तो लंबे समय तक वे राष्ट्रीय टीम में बने रहेंगे.

अफ़रीदी ने विश्व कप के तीन मैचों में सिर्फ़ 16 रन बनाए थे. बाद में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने उन्हें भारत के ख़िलाफ़ मैच में बदसलूकी के कारण उन्हें कुछ समय के लिए निलंबित कर दिया.

शाहिद अफ़रीदी के लिए उनका क्रिकेट करियर उतार-चढ़ाव भरा रहा है. 1997 में एक लेग स्पिनर के रूप में टीम में शामिल किए गए अफ़रीदी ने सुर्ख़ियाँ बटोरीं अपने विस्फोटक बल्लेबाज़ी के कारण.

उन्होंने श्रीलंका के ख़िलाफ़ वनडे मैच में सिर्फ़ 37 गेंदों पर शतक ठोंक डाले.