शायद की किसी फ़ुटबॉल के मैदान पर ऐसा नज़ारा देखने को मिला होगा. गोलों की जैसे बौछार सी हो रही थी और एक नहीं दो-दो मैदानों पर.
मैदान पर लग नहीं रहा था की कौन टीम विपक्ष की है. विपक्षी खिलाड़ी भी सामने वाली टीम को सहयोग दे रहे थे और एक मौक़े पर गोलकीपर गोलपोस्ट छोड़कर ही चला गया.
हालाँकि इन दुर्भाग्यपूर्ण मैचों में शामिल चारों टीमों को एक साल के लिए निलंबित कर दिया गया लेकिन इसके बावजूद मैदान पर जो कुछ हुआ उसे शायद ही आसानी से भुलाया जा सके.
एक दिन में 118 गोल. आज के युग में इसकी कल्पना ही की जा सकती है. लेकिन ऐसा हुआ भारत के गोवा राज्य में.
जहाँ सेकेंड डिविज़न लीग मैच से फ़र्स्ट डिविज़न लीग में प्रोमोशन के लिए अलग-अलग मैच खेल रहे दो क्लबों में जैसे एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ सी लग गई.
लेकिन आगे निकलने के लिए जिस तरह मैदान पर मज़ाक हुआ और आचारसंहिता के परखच्चे उड़े उससे शायद ही किसी खेल प्रेमी को गर्व हुआ होगा.
ऐसी होड़
मैच के पहले कर्टोरिम जिमखाना और विल्फ़्रेड लिज़र अंकों के आधार पर बराबर थे.
![]() गोवा में फ़ुटबॉल बहुत लोकप्रिय है |
आख़िरी मैच में प्रोमोशन पाने के लिए विल्फ़्रेड को जिमखाना की तुलना में सात गोल के अंतर से जीत हासिल करनी थी.
दोनों टीमें अलग-अलग मैदान पर अलग-अलग टीमों से भिड़ रही थी लेकिन दोनों टीमों के अधिकारियों का ध्यान था एक दूसरे के स्कोर पर.
हाफ टाइम तक विल्फ़्रेड की टीम पाउला स्पोर्ट्स क्लब से सात गोल से आगे थी जबकि कर्टोरिम जिमखाना की टीम संगोल्डा लाइटनिंग से मात्र एक गोल से आगे थी.
लेकिन हाफ टाइम के बाद खेल के मैदान पर जो भी हुआ उस पर किसी को शर्म ही आ सकती है.
एक मिनट से भी कम में एक गोल. पाउला स्पोर्ट्स क्लब और संगोल्डा लाइटनिंग के खिलाड़ी जैसे गेंद अपने पास रखना ही नहीं चाहते थे.
पाउला स्पोर्ट्स क्लब का गोलकीपर तो दर्शकों की हूटिंग से इतना चिढ़ गया कि वह दूसरे खिलाड़ी को गोलपोस्ट के पास छोड़कर आगे निकल गया.
पाउला स्पोर्ट्स के खिलाड़ी तो विपक्षी टीम के हाफ में भी जाने से कतरा रहे थे.
मैच फ़िक्सिंग?
दोनों मैचों का स्कोर कुछ यूँ रहा. कर्टोरिम जिमखाना ने जीत हासिल की 61-1 से तो विल्फ़्रेड की टीम जीती 55-1 से.
इसी से आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि मैदान पर क्या हाल हुआ होगा.
हेरल्ड अख़बार के लिए मैच कवर कर रहे खेल पत्रकार एंथनी मार्कस के लिए यह एक ऐसा मैच था जो उन्होंने अपने जीवन में नहीं देखा था.
मार्कस ने बताया, "पाउला के खिलाड़ी विपक्षी खिलाड़ियों को ही गेंद पास कर दे रहे थे. अपने गोल में तो दो गोल उन्होंने ख़ुद मारे."
मार्कस के अनुसार टीम में तीन बार अपना गोलकीपर बदला लेकिन हालात नहीं बदले और एक मौक़े पर पाउला का खिलाड़ी खुले गोल में भी गेंद नहीं डाल पाया.
कर्टोरिम जिमखाना और संगोल्डा के मैच में रेफ़री बेंजामिन सिल्वा ने बीबीसी को बताया कि सेकंड हाफ में मामला साफ़ तौर पर गड़बड़ लग रहा था.
मैच फ़िक्सिंग के आरोपों के बीच गोवा फ़ुटबॉल एसोसिएशन ने चारों टीमों को एक साल के लिए निलंबित कर दिया.
लेकिन इन टीमों पर स्थायी रूप से प्रतिबंध लगाने की माँग हो रही है.