बात 1976 की है जब कपिल देव 17 बरस के थे और चंडीगढ़ में अपनी गेंदबाज़ी की धार तेज़ कर रहे थे.
एक ट्रेनिंग कैंप में उन्होंने खाने के लिए और रोटियाँ माँगीं लेकिन उन्हें रोटियाँ नहीं दी गईं.
रोटियाँ तो नहीं ही मिलीं, ताने अलग से सुनने पड़े.
भारत के चोटी के बल्लेबाज़ रहे हरफ़नमौला खिलाड़ी कपिल देव रामलाल निखंज के साथ ये वाक़या हुआ मुंबई के क्रिकेट क्लब ऑफ़ इंडिया के एक ट्रेनिंग कैंप में.
कपिल ने पिछले दिनों इसी क्लब में 28 साल पुरानी अपनी आपबीती युवा खिलाड़ियों को सुनाई.
आपबीती
कपिल के रोटी माँगने पर अनुशासन के लिए मशहूर कैंप कमांडर केकी तारापोर ने उनसे पूछा,"तुम्हें और रोटियाँ क्यों चाहिए?".
कपिल ने कहा,"मैं जवान हूँ और ताक़तवर बनना चाहता हूँ ताकि भारत के लिए तेज़ गेंदबाज़ी कर सकूँ".
तारापोर ने झिड़कते हुए उनसे कहा,"भूल जाओ ये सब. तुम्हारे लिए अलग से कुछ भी नहीं होगा. मैं तेज़ गेंदबाज़ों को शक्ल से ही पहचान जाता हूँ".
और इस घटना के दो साल बाद कपिल ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में क़दम रखा और देखते-देखते बुलंदियों तक पहुँच गए.
कपिल ने जिस वक़्त टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहा उस वक़्त वे टेस्ट मैचों में सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज़ थे.
उन्होंने 131 टेस्ट मैचों में 434 विकेट लिए और साथ ही 5,248 रन भी बनाए.
225 एक दिवसीय मैचों में उन्होंने 253 विकेट लिए और 3,783 रन बनाए.
और मुंबई के क्रिकेट क्लब में अपनी आपबीती सुनाने के बाद कपिल जब खाने की मेज़ की ओर बढ़े तब अधिकारियों ने कपिल के सामने चपातियों की प्लेट रख डाली.
अधिकारियों ने उनसे कहा,"सर, आप जितनी चपातियाँ चाहें ले सकते हैं".
और कपिल ने कहा,"बेशक, मैं ज़रूर लूँगा".