प्रमुख भारतीय बल्लेबाज़ सचिन तेंदुलकर ऑस्ट्रेलिया दौरे पर कोई व्यक्तिगत लक्ष्य तय कर अपने ऊपर दबाव नहीं डालना चाहते हैं.
उनके समर्थक उम्मीद लगाए बैठे हैं कि वह रनों का अंबार खड़ा कर दुनिया की बेहतरीन टेस्ट टीम के ख़िलाफ़ भारत को चुनौती में खड़ा कर सकेंगे.
दौरे की शुरुआत में मेलबोर्न में विक्टोरिया टीम के ख़िलाफ़ 80 रनों की पारी खेल उन्होंने उम्मीदें तो बढ़ा ही दी है.
सचिन ने कहा, "मैं नहीं जानता कि इस दौरे में मैं क्या कुछ हासिल करने वाला हूँ. मैं तो वहाँ सिर्फ क्रिकेट खेल का मज़ा उठाना चाहता हूँ."
उन्होंने कहा, "मैं इस बारे में सोच कर अपने ऊपर दबाव नहीं डालना चाहता कि मुझे क्या उपलब्धि हासिल होगी."
सचिन ने 1991-92 में सिडनी और पर्थ टेस्ट में शतक लगाए थे. चार साल पहले भी उन्होंने मेलबोर्न में शतकीय पारी खेली थी.
लेकिन उनके शतकीय योगदानों के बावजूद दोनों दौरों में भारतीय टीम को भारी पराजय का सामना करना पड़ा था.
भारत को 1991-92 में पाँच से चार टेस्ट मैचों में हार का मुँह देखना पड़ा था, जबकि एक मैच ड्रॉ छूटा था.
इसी तरह 1999-2000 में भारत तीनों टेस्ट मैच गँवा बैठा था.
चुनौती
भारतीय कप्तान सौरभा गांगुली ने स्वीकार किया है कि टीम के लिए आने वाले कुछ दिन चुनौती भरे हैं.
उन्होंने कहा, "सोलहों खिलाड़ियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि हम बढ़िया प्रदर्शन करें."
गांगुली ने कहा, "हमें पता है कि हम कुछ मैच गँवाने जा रहे हैं, क्योंकि प्रतिद्वंद्वी टीम बहुत ही अच्छी है. लेकिन यदि हम कुछ मैच जीतते हैं तो कुछ मैच गंवाना उतना बुरा नहीं लगेगा."
उल्लेखनीय है कि हाल की त्रिकोणीय श्रृंखला के दौरान गांगुली ने न्यूज़ीलैंड के खिलाड़ियों से यह जानने की कोशिश की थी कि ऑस्ट्रेलियाइओं से कैसे निबटा जाए.