हैदराबाद में भारत का सबसे बड़ा मेला यानी पहले अफ़्रो एशियाई खेल आज समाप्त हो गए.
एक ओर गीत और संगीत और फ़िल्मी सितारों से भरे समारोह में इन खेलों के प्रतीक शेरु को भावभीनी बिदाई दी गई तो दूसरी ओर इस बात का इरादा भी जताया गया कि भारत ओलम्पिक जैसे बड़े आयोजनों की मेज़बानी भी करेगा.
राष्ट्पति एपीजे अब्दुल कलाम ने इसकी औपचारिक घोषणा करते हुए कहा कि एशियाई खेलों के बाद इन अफ़्रो-एशियाई खेलों के आयोजन से भारत की क्षमता बढ़ी है.
उन्होंने कहा कि अब भारत में ओलम्पिक और राष्ट्रमंडल खेलों की क्षमता हासिल कर ली है.
दूसरी ओर भारतीय ओलम्पिक संघ के अध्यक्ष ने कहा कि भारत को 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन की ओर पहले ध्यान देना चाहिए.
पटाखों और रंगीन रोशनी के बीच तब्बू और युक्ता मुखी का आकर्षण था तो दूसरी और गायक हरिहरण ''शेरु तुमने क्या किया कमाल'' गाते हुए खेलों के प्रतीक शेरु को भावभीनी विदाई दी.
और फिर अफ़्रीकी कलाकार हद्दाद का भी बड़ा आकर्षण था.
दो महाद्वीपों के बीच सेतु बनाने की एक कोशिश के रुप में यह आयोजन अपने आपमें एक बड़ा संदेश दे गया है.