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क्रिकेट मैदान पर गाली-गलौज की तो प्रतिबंध

ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट खिलाड़ी मैदान पर ही गाली-गलौज करने के लिए बदनाम हैं लेकिन अब उन्हें अपने इस शौक के लिए ख़ामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है.

अगर अब उन्हें अपशब्दों का प्रयोग करते हुए पाया गया तो उनपर पूरी उम्र के लिए प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है.

ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड ने कहा है कि अगर खिलाड़ियों ने व्यवहार से जुड़ी नई आचार संहिता तोड़ी तो उन पर आजीवन प्रतिबंध लग सकता है.

ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों पर खेल के दौरान दुर्व्यवहार और गाली-गलौज के आरोप लगते रहे हैं और इसके लिए उनकी बड़ी आलोचना भी होती रही है.

बोर्ड के अनुसार अब अगर खिलाड़ियों ने जातीय या धार्मिक तौर पर कुछ अपशब्द कहे तो नई नीति के तहत उन पर पाँच मैचों से लेकर आजीवन तक का प्रतिबंध लग सकता है.

इसके अलावा खिलाड़ियों ने अगर अंपायर से कोई अभद्रता की या अनावश्यक अपील की तो इसके लिए भी खिलाड़ियों पर ज़ुर्माना लगाया जा सकता है.

स्पष्ट निर्देश

ऑस्ट्रेलियाई बोर्ड के ऑपरेंशन्स मैनेजर माइकल ब्राउन ने इस बारे में कहा, "हमने अपने खिलाड़ियों को स्पष्ट शब्दों में बता दिया है कि हम क्या चाहते हैं."

उन्होंने कहा कि 2003-04 के दौरान कड़े ज़ुर्माने लगाए जाएँगे.

ज़िम्बाब्वे के विरुद्ध टीम की दो टेस्ट की सीरीज़ नौ अक्तूबर से शुरू हो रही है.

इस साल मई में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष मैल्कम ग्रे ने ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के वेस्टइंडीज़ दौरे पर बर्ताव की जाँच के आदेश दिए थे.

उस दौरान ऑस्ट्रेलियाई तेज़ गेंदबाज़ ग्लेन मैक्ग्रा और वेस्टइंडीज़ के बल्लेबाज़ रामनरेश सरवन के बीच झड़प हो गई थी जिस पर मैक्ग्रा की काफ़ी आलोचना हुई थी.

बताया जाता है कि उसके बाद बोर्ड के अध्यक्ष जेम्स सदरलैंड ने टीम के कप्तान स्टीव वॉ से कहा था कि खिलाड़ियों की भावनाओं पर क़ाबू रखने पर विचार होना चाहिए.

ग्रे ने उस समय कहा था कि यूँ तो ये आईसीसी का मामला है मगर दीर्घकालिक तौर पर देखा जाए तो यह राष्ट्रीय संस्थाओं का काम होगा क्योंकि तभी खिलाड़ियों का बर्ताव सुधर सकेगा.

इसी तरह पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावसकर ने भी ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के व्यवहार की आलोचना की थी.