रोहित शर्मा और अक्षर पटेल के सामने बेबस दिखा ऑस्ट्रेलिया

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- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
- प्रकाशित

भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया, दूसरा टी-20 मैच, नागपुर
ऑस्ट्रेलिया 90-5 (8 ओवर) मैथ्यु वेड 43* (20), फिंच 31* (15)
भारत 92-4 (7.2 ओवर) रोहित शर्मा 46* (20) विराट कोहली 11* (6)
भारत ने ऑस्ट्रेलिया को छह विकेट से हरा दिया, सिरीज़ एक-एक की बराबरी पर

भारत को अगले माह होने वाले टी-20 विश्व कप से पहले एक मैच विनर मिल गया है. यह मैच विनर अक्षर पटेल हैं.
वह ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ मौजूदा सिरीज़ में खेले दो मैचों में अपनी पैनापन लिए गेंदबाज़ी से रविंद्र जडेजा की जगह को भरने में सफल हो गए हैं.
अक्षर ने भारत को नागपुर में खेले गए दूसरे टी-20 मैच में अपनी गेंदबाज़ी के कमाल से छह विकेट से जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई. भारत इस जीत से सिरीज़ में एक-एक की बराबरी में आ गया है.
अब हैदराबाद में खेले जाने वाले तीसरे टी-20 मैच से सिरीज़ का फ़ैसला होगा.
बारिश के कारण आठ-आठ ओवर के मैच में ऑस्ट्रेलिया के लिए कप्तान एरोन फिंच और केमरून ग्रीन ने आक्रामक शुरुआत की. लेकिन अक्षर पटेल ने आते ही अपने पहले ओवर में अच्छी समझ का प्रदर्शन करके विराट कोहली की थ्रो पर फुर्ती दिखाकर केमरून ग्रीन को रनआउट किया और इसी ओवर में ग्लेन मैक्सवेल को बोल्ड करके तगड़ा झटका दे दिया.
अक्षर पटेल ने अपने दूसरे ओवर में टिम डेविड को बोल्ड करके अपनी गेंदबाज़ी के झंडे गाड़ दिए. उन्होंने दो ओवरों में 13 रन देकर दो विकेट निकाले. मोहाली में हारे पहले मैच में भी उन्होंने अपनी गेंदबाज़ी से प्रभावित किया था और चार ओवरों में 17 रन देकर चार विकेट निकाले थे. उन्होंने अपनी गेंदबाज़ी से यह तो साबित कर दिया है कि विश्व कप में वह जडेजा की कमी को नहीं खलने देंगे.
अक्षर पटेल ने मैच के बाद कहा, ''बल्लेबाज़ के खेलने के अंदाज़ को ध्यान में रखकर गेंदबाज़ी की लाइन और लेंथ पर गेंदबाज़ी करने का प्रयास करता हूँ. साथ ही पावर प्ले में गेंदबाज़ी करते समय मेरी गेंद थोड़ी स्किड करती है और विकेट पर गेंद को रखने से मुझे सफलताएं मिलती हैं. मैं ज़्यादा ना सोचकर विकेट पर गेंदबाज़ी करने का प्रयास करता हूँ.''

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जडेजा की जगह भरने में सफल अक्षर
अब सवाल यह है कि अक्षर क्या रविंद्र जडेजा की तरह बल्लेबाज़ी कर सकेंगे, क्योंकि वह चोटिल होने की वजह से विश्व कप टीम में नहीं हैं. यह सही है कि जडेजा इस प्रारूप के बहुत ही आक्रामक बल्लेबाज़ हैं. जहाँ तक अक्षर की बात है तो उन्होंने कुछ मौक़ों पर अपनी अच्छी बल्लेबाज़ी का प्रदर्शन किया है.
हालांकि वह मोहाली में अपनी बल्लेबाज़ी की छाप नहीं छोड़ नहीं पाए थे और इस मैच में उनके खेलने का मौक़ा नहीं आया. पर इतना ज़रूर है कि बल्लेबाज़ी में उनके ऊपर भरोसा किया जा सकता है.
भारत के दिग्गज स्पिनरों में शुमार रहे मनिंदर सिंह ने एक बार कहा था कि अक्षर की सबसे बड़ी ख़ूबी, उनका अपनी ताक़त को अच्छी तरह से पहचानना है. वह अपनी ताक़त के हिसाब से सही लाइन और लेंथ पर गेंदबाज़ी करके अपना प्रभाव छोड़ने में सफल रहे हैं. उन्होंने कहा कि कई बार गेंदबाज़ को लगता है कि वह अंतरराष्ट्रीय मैच खेल रहा है, इसलिए वह फ्लाइट देना शुरू कर देता है. पर अक्षर सिर्फ़ अपनी ताक़त के हिसाब से ही गेंदबाज़ी करना पसंद करता है.

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रंग में रोहित शर्मा
मैच आठ ओवरों का था और भारत के सामने 91 रन का लक्ष्य था, इसलिए आक्रामक अंदाज़ से खेलना जरूरी था. रोहित इस ज़िम्मेदारी को अच्छे से निभाने में कामयाब रहे. उन्होंने हेजलवुड के पहले ओवर में दो छक्के लगाकर अपने इरादे जता दिए. इस ओवर में केएल राहुल ने भी एक छक्का लगाया और भारत पहले ओवर में 21 रन बनाकर मनचाही शुरुआत करने में सफल हो गया.
आक्रामक शुरुआत का ही नतीजा था कि तीसरे ओवर की पांचवीं गेंद पर राहुल के आउट हो जाने के समय तक भारत 39 रन बनाकर अच्छी स्थिति में पहुँच गया था. पर इसके बाद विराट कोहली और सूर्यकुमार यादव के जल्दी आउट हो जाने से एक बार लगा कि ऑस्ट्रेलिया भारत पर दवाब बनाने की स्थिति में हैं.
लेकिन कप्तान रोहित ने हार्दिक पांड्या के साथ मिलकर टीम को जीत की राह पर बनाए रखा. रोहित ने 230 की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करके 20 गेंदों में चार छक्कों और चार चौकों से नाबाद 46 रन बनाए.
विराट कोहली अच्छे टच में दिख रहे थे और उन्होंने ज़रूरत के हिसाब से बल्लेबाज़ी करके छह गेंदों में दो चौकों से 11 रन बना लिए थे. लेकिन स्पिनरों के ख़िलाफ़ अक्सर उनकी यह दिक़्क़त दिखती रही है कि वह कई बार शॉट खेलने के लिए कलाई को जल्दी मोड़ देते हैं और इस कारण विकेट गंवाना पड़ता है. उन्होंने जिस तरह से सामने खेलकर दो चौके लगाए. वह यदि उसी तरह से स्पिनरों को खेलें तो ज़्यादा कामयाब होने की संभावना रह सकती है.

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बुमराह की ज़ोरदार वापसी
जसप्रीत बुमराह लंबे समय बाद प्रतियोगात्मक मैच नहीं खेल रहे थे. इसलिए कप्तान रोहित ने उनसे गेंदबाज़ी की शुरुआत ना कराकर होशियारी भरा क़दम उठाया. लेकिन बुमराह ने ऑस्ट्रेलियाई कप्तान फिंच को सेट अप करके आउट किया, उससे यह साबित हो गया कि वह जल्दी ही पूरी रंगत में नज़र आन लगेंगे. उन्होंने यॉर्कर पर बोल्ड किया. उन्होंने दो ओवरों में 23 रन देकर एक विकेट निकाला.
भारत को अब भी डेथ ओवर्स की गेंदबाज़ी में कसावट लाने की जरूरत है. पहले मैच में भुनेश्वर कुमार इस भूमिका में असफल रहे थे. इस मैच में हर्षल पटेल भी अपनी गेंदबाज़ी की छाप छोड़ने में सफल नहीं हो सके. उन्होंने अपने आख़िरी ओवर में तीन छक्के खा लिए. हर्षल ने दो ओवरों में 32 रन दिए और विकेट की उनसे दूरी बनी रही.

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कार्तिक खरे उतरे अपनी भूमिका में
भारतीय टीम प्रबंधन विकेट कीपर के तौर पर दिनेश कार्तिक और ऋषभ पंत में से किसे खिलाए असमंजस में लग रहा है. दिनेश कार्तिक मोहाली वाले मैच में अपनी बल्लेबाज़ी से प्रभावित नहीं कर सके थे और विकेट कीपिंग भी कोई खास नहीं रही थी.
इस मैच में कार्तिक और पंत दोनों को खिलाया गया. कार्तिक ने दो गेंदों पर 10 रन बटोर कर यह दिखा दिया कि वह डेथ ओवर्स में बल्लेबाज़ी के मास्टर हैं. लेकिन इन दोनों के खेलने की वजह से पाँच ही गेंदबाज खेल सके.
यह मैच आठ ओवर का था, इसलिए यह प्रयोग चल गया. पर पूरे मैच में एक गेंदबाज़ की धुनाई होने पर एक अतिरिक्त गेंदबाज़ का होना जरूरी है. यही नहीं युजवेंद्र चहल को भी गेंदबाज़ी में थोड़ा सुधार करने की ज़रूरत है और ऐसा करने में वह सक्षम हैं.
ऋषभ पंत को मैच में बल्लेबाज़ी का मौक़ा ही नहीं मिला. अब हैदराबाद मैच से ही पता चल पाएगा कि कि राहुल द्रविड़ की अगुआई वाला टीम प्रबंधन विकेट कीपर के बारे में क्या सोच रहा है.
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