इरफ़ान पठान ने क्रिकेट के हर फ़ॉर्मेट से लिया संन्यास

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भारतीय क्रिकेटर इरफ़ान पठान ने क्रिकेट के सभी फ़ॉर्मेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है.
12 दिसंबर 2003 को पहली बार भारतीय क्रिकेट टीम के लिए खेलने वाले इरफ़ान पठान ने शनिवार को एक प्रेस वार्ता में इसकी घोषणा की.
'स्विंग के किंग' कहे जाने वाले इरफ़ान पठान ने इस मौक़े पर कहा, "2016 में घरेलू क्रिकेट की सैय्यद मुश्ताक़ अली ट्राफ़ी में मैंने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था. मैं उस साल बेस्ट ऑलराउंडर था जिसे आधार बनाकर मैंने टीम के चयनकर्ताओं से बात की थी. पर वो मेरे बॉलिंग एक्शन से ख़ुश नहीं थे. तब मुझे समझ आया कि आप भले ही अच्छा प्रदर्शन करें, पर चयनकर्ता ख़ुश नहीं हैं तो टीम में एंट्री नामुमकिन है. इसलिए साल 2017 में मैं सारी उम्मीदें छोड़ चुका था."
"मैंने संन्यास की घोषणा पहले इसलिए नहीं की क्योंकि मैं जम्मू-कश्मीर क्रिकेट के लिए खेल भी रहा था. उन्हें ट्रेनिंग भी दे रहा था. अब 35 वर्ष का हो चुका हूँ. खेल से दूरी बना रहा हूँ. अपने प्यार से दूरी बना रहा हूँ. पर क्रिकेट खिलाड़ियों के साथ रिश्ता क़ायम रहेगा."
संन्यास का ऐलान करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें सचिन तेंदुलकर और सौरभ गांगुली जैसे महान खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौक़ा मिला जो हर क्रिकेटर की तमन्ना होती है. साथ ही उन्होंने अपने चाहने वालों और पूर्व साथी खिलाड़ियों को उनके साथ खड़े होने के लिए शुक्रिया कहा.
टेस्ट मैच में हैट्रिक
साल 2006 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ टेस्ट मैच खेलते हुए एक साथ तीन विकेट झटक हैट्रिक लगाने के लिए इरफ़ान पठान को हमेशा याद किया गया.

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भारत के उन तीन गेंदबाज़ों की फ़ेहरिस्त में इरफ़ान पठान का नाम भी शामिल रहा जिन्होंने टेस्ट मैचों में हैट-ट्रिक अपने नाम की.
'अंडर-14 क्रिकेट' में बड़ौदा के लिए खेल चुके इरफ़ान पठान वनडे क्रिकेट में सबसे तेज़ी से 100 विकेट हासिल करने वाले तीसरे गेंदबाज़ रहे.
साल 2011-12 के दौरान वह ख़राब फ़ॉर्म में होने के कारण भारतीय क्रिकेट टीम से बाहर हो गए थे.
आख़िरी मैच
उन्होंने अपना आख़िरी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ 2 अक्तूबर 2012 को खेला था जो एक टी-20 मैच था.
कई क्रिकेट समीक्षक मानते हैं कि भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कोच ग्रेग चैपल ने जब इरफ़ान पठान के बॉलिंग एक्शन में कुछ परिवर्तन करने की कोशिश की और उन्हें एक तेज़ गेंदबाज़ से ऑलराउंडर बनाना चाहा, तो उससे इरफ़ान के करियर में बड़ा बदलाव शुरू हुआ.
इरफ़ान पठान भारतीय क्रिकेट में एक तेज़ गेंदबाज़ के रूप में धूमकेतु की तरह उभरे थे.

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उनकी तेज़ गेंदों का आलम यह था कि जब भी उन्हें मददगार विकेट मिलता, उन्हें खेल पाना सामने वाली टीमों के लिए नामुमकिन सा हो जाता था.
लंबा क़द, साफ़-सुथरा बॉलिंग एक्शन और खब्बू गेंदबाज़ होना उन्हें अन्य भारतीय गेंदबाज़ों की तुलना में और भी ख़तरनाक बनाता था.
लेकिन जब उन्होंने कोच ग्रेग चैपल के कहने पर बॉलिंग में अधिक स्विंग लाने की कोशिश की तो उनकी गेंदों की रफ़्तार में कमी दर्ज की गई.
उस दौर में तेज़ गेंदबाज़ी की समझ रखने वाले क्रिकेट समीक्षकों ने कहा भी था कि अगर गेंद में रफ़्तार कम हो जाए, तो फिर बल्लेबाज़ के लिए स्विंग गेंदों को खेलना मुश्किल नहीं होता.

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इसके अलावा इरफ़ान पठान अपनी बल्लेबाज़ी पर अधिक ध्यान देने लगे थे. पर एक ऑलराउंडर की भूमिका में वो ज़्यादा क़ामयाब नहीं हुए, बल्कि धीरे-धीरे उनका करियर उतार की तरफ चल पड़ा.
हालांकि बाद में इरफ़ान पठान ने जो इंटरव्यू दिये, उनमें उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि उनके करियर में जो बदलाव आए, उनके पीछे कोच ग्रेग चैपल के निर्णय कोई विशेष वजह नहीं थे.
जबकि उस दौर में ग्रेग चैपल के टीम के ऑर्डर से जुड़े निर्णयों की टीम के अन्य खिलाड़ियों जैसे सचिन, हरभजन सिंह, विरेंद्र सहवाग और सौरभ गांगुली ने आलोचना की थी.
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