BBC Hindi: बीते हफ़्ते की वो ख़बरें, जो शायद आप मिस कर गए

हर घर तिरंगा अभियान

इमेज स्रोत, Getty Images

प्रकाशित

हेलो. उम्मीद है कि आप अच्छे होंगे, खुश होंगे और सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहे होंगे.

हम जानते हैं कि व्यस्तता के बीच आपके लिए सारी ख़बरों पर नज़र रखना मुश्किल रहता होगा.

ऐसे में हम लाए हैं बीते सप्ताह की कुछ दिलचस्प और अहम ख़बरें, जिन पर शायद आपकी नज़र ना गई हो.

ये पांच ख़बरें आपने पढ़ लीं तो ये समझिए कि आप पूरी तरह से अपडेटेड हो गए.

हर घर तिरंगा: कितना और कैसे ख़र्च कर रही है सरकार

भारत आज़ादी की 75वीं सालगिरह का जश्न मना रहा है. इस जश्न को 'आज़ादी का अमृत महोत्सव' नाम दिया गया है. इस मौके पर भारत सरकार ने 'हर घर तिरंगा' अभियान की शुरुआत का एलान किया है.

इस अभियान के तहत 13-15 अगस्त के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर घर पर तिरंगा फहराने का आग्रह किया है. सरकार के मुताबिक इस अभियान के साथ नागरिकों का तिरंगे के साथ रिश्ता और गहरा होगा. नागरिकों में देशभक्ति की भावना इससे और प्रबल होगी.

फ़िलहाल राष्ट्रीय ध्वज के साथ भारत के नागरिकों का व्यक्तिगत से ज़्यादा औपचारिक और संस्थागत रिश्ता है. भारत सरकार को लगता है कि 'हर घर तिरंगा' अभियान के बाद ये संबंध ज़्यादा व्यक्तिगत हो सकेगा. अभियान के शुरु होने में अभी 10 दिन से ज़्यादा का वक़्त है. लेकिन इससे जुड़े दो विवाद शुरू हो गए हैं. पहला विवाद जम्मू कश्मीर के एक ज़िले के शिक्षा विभाग के आदेश से जुड़ा है. पूरी स्टोरी यहां पढ़ें...

ड्रोन

इमेज स्रोत, Chris Gorman/Getty Images

रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन कितने कारगर, कितने घातक

रूस-यूक्रेन युद्ध में हज़ारों ड्रोन इस्तेमाल किए जा रहे हैं. इनका इस्तेमाल दुश्मनों का ठिकाना ढूंढने, मिसाइल दागने और आर्टिलरी फायरिंग में हो रहा है. रूस और यूक्रेन दोनों ख़ास मकसद वाले ड्रोन इस्तेमाल कर रहे हैं.

पहले से तैयार और बाज़ार में धड़ल्ले से बिकने वाले ड्रोन का खूब इस्तेमाल हो रहा है.

यूक्रेनी सेना सबसे ज़्यादा जिस ड्रोन का इस्तेमाल कर रही है, वह तुर्की में बना बेरक्तार TB2 है. इसका आकार एक छोटे प्लेन के बराबर होता है. ये लेज़र गाइडेड बमों से लैस किए जा सकते हैं.

थिंक टैंक रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट के डॉ. जैक वेटलिंग का कहना है कि जब युद्ध शुरू हुआ था तो यूक्रेन के पास 50 से भी कम ड्रोन थे. वह कहते हैं, ''रूस इससे छोटे और बेसिक ड्रोन ओरलान-10 का इस्तेमाल करता है.' रूस ने कुछ हज़ार ड्रोन के साथ लड़ाई शुरू की थी. लेकिन अब उसके पास अब कुछ सौ ड्रोन ही बचे होंगे. ये ड्रोन कैमरों से लैस होते हैं और ये छोटे बम ले जा सकते हैं. पूरी स्टोरी यहां पढ़ें...

दिलीप कुमार

इमेज स्रोत, VIMAL THAKKER

इमेज कैप्शन, दिलीप कुमार

'प्यासा' के लिए जब गुरुदत्त को ज़बान दे पलट गए दिलीप कुमार

गुरुदत्त को बातें करने का शौक नहीं था. वहीदा रहमान ने एक बार उनके बारे में कहा था कि 'जब हम उनके बगल में बैठकर किसी तीसरे आदमी से बातें करते थे तो हमें अक्सर ये आभास होता था कि वो हमारी बातें सुन नहीं रहे हैं, वो अपने विचारों में ही खोए रहते थे'.

'अगर कोई मुझसे पूछे कि उन्हें सबसे ज़्यादा क्या पसंद था तो मेरा जवाब होगा उनका काम. उनके लिए उनका काम सबसे पहले आता था. उसके बाद ही उनके बीबी बच्चों का नंबर आता था, फ़िल्म बनाने के लिए उनके अंदर एक तरह का जुनून था.'

प्यासा फ़िल्म उनके दिल के बहुत करीब थी. इसके लिए वो उस ज़माने के टॉप स्टार दिलीप कुमार को लेना चाहते थे. जब गुरुदत्त ने दिलीप कुमार को प्यासा की पटकथा सुनाई तो वो इस फ़िल्म में काम करने के लिए तैयार हो गए. अगले दिन उन्होंने फ़िल्म की शूटिंग में आने का वादा भी कर लिया. लेकिन पूरी यूनिट दिलीप कुमार का इंतज़ार ही करती रह गई, वे शूटिंग पर नहीं पहुंचे. पूरी स्टोरी यहां पढ़ें...

मंकीपॉक्स जांच

इमेज स्रोत, Getty Images

मंकीपॉक्स से जुड़ी वो पांच भ्रामक बातें जिनसे बचना है ज़रूरी

भारत में फ़िलहाल मंकीपॉक्स के कुल चार मामले सामने आ चुके हैं. केरल के तीन और दिल्ली के एक मरीज़ में इसके वायरस की पुष्टि की गई है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मंकीपॉक्स को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी बताया है. जिसके बाद आमलोगों के ज़ेहन में फिर से लॉकडाउन, प्रतिबंध और सोशल डिस्टेंसिंग का डर घर करने लगा है. कोविड महामारी के बाद इस नए वायरस के दस्तक ने लोगों को सकते में डाल दिया है.

नए वायरस से जुड़े तमाम सवालों के बीच कई भ्रामक बातें और दावे हैं, जो तेज़ी से फैल रहे हैं.

मसलन, कहा जा रहा है कि मंकीपॉक्स कोविड-19 जैसी ही एक नई महामारी है. या ये कि इससे केवल समलैंगिक लोगों को ही इससे ख़तरा है. या फिर ये कहना कि इसका कोई इलाज नहीं है. या फिर शारीरिक संबंध बनाने से मंकीपॉक्स हो सकता है, और इसकी पहचान के लिए फ़िलहाल कोई जांच सुविधा मौजूद नहीं है. बीबीसी आपको इन्हीं भ्रामक बातों की सच्चाई बताने जा रहा है. ये तमाम जानकारियां हमने विश्व स्वास्थ्य संगठन की वेबसाइट के हवाले से साझा की हैं. पूरी स्टोरी यहां पढ़ें...

भारतीय महिला क्रिकेट टीम

इमेज स्रोत, SANKA VIDANAGAMA/AFP via Getty Images

कॉमनवेल्थ गेम्स 2022: पहली बार होगा महिला क्रिकेट, कौन है भारत की सबसे बड़ी चुनौती

बर्मिंघम में एजबेस्टन के मैदान में जब भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर और ऑस्ट्रेलिया की महिला टीम की कप्तान मेग लैनिंग टॉस के लिए उतरेंगी तो यह कॉमनवेल्थ खेलों में 24 साल के बाद क्रिकेट की वापसी होगी.

हालांकि, यह पहला मौका है जब कॉमनवेल्थ खेलों में महिला क्रिकेट खेला जाएगा. 29 जुलाई से 7 अगस्त के बीच दुनिया की आठ टीमों के बीच गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज़ मेडल के लिए मुक़ाबला होगा.

इससे पहले, 1998 के कुआलालम्पुर कॉमनवेल्थ खेलों में पुरुष क्रिकेट के मुक़ाबले हुए थे, तब 50 ओवरों के मैच में 16 टीमों ने हिस्सा लिया था. दक्षिण अफ्रीकी टीम ने गोल्ड मेडल जीता था जबकि ऑस्ट्रेलिया ने सिल्वर और न्यूज़ीलैंड की टीम ने ब्रॉन्ज़ मेडल हासिल किया था.

इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) और इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) ने इस बार कॉमनवेल्थ खेलों में महिला क्रिकेट को शामिल कराया है. इस बार मुक़ाबले 20-20 ओवरों के खेले जाएंगे. मेजबान टीम होने के चलते इंग्लैंड अपने आप क्वालिफ़ाई कर गई है. इंग्लैंड के अलावा मौजूदा महिला क्रिकेट की पांच सर्वश्रेष्ठ टीम - ऑस्ट्रेलिया, भारत, न्यूज़ीलैंड, दक्षिण अफ्ऱीका और पाकिस्तान को आईसीसी की महिला टी-20 रैंकिंग के आधार पर प्रवेश मिला है. पूरी स्टोरी यहां पढ़ें...

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)