सोमवार, 06 अक्तूबर, 2008 को 12:49 GMT तक के समाचार
वर्ष 2008 के लिए चिकित्सा के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार एक जर्मन और दो फ़्रांसीसी वैज्ञानिकों को संयुक्त रूप से दिया गया है.
जर्मन वैज्ञानिक हारल्ड त्ज़ुर हाउज़न को सर्वाइकल कैंसर और फ़्रांसीसी वैज्ञानिकों फ़्रांसुआज़ बाग़े सिनोसी और लुक मोंतानिए को एड्स के वायरस एचआईवी से जुड़े काम के लिए ये पुरस्कार दिया गया है.
जर्मनी के हारल्ड त्ज़ुर हाउज़न ने ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) और सर्वाइकल कैंसर के बीच के संबंध का पता लगाया था.
वर्ष 1981 में जब शरीर में प्रतिरोध की क्षमता को कम करने वाले सिंड्रोम की ख़बरें आईं तो प्रोफ़ेसर बाग़े सिनोसी और डॉक्टर मोंतानिए ने सबसे पहले पता लगाया था कि उसकी वजह एचआईवी है.
एचआईवी
पुरस्कार की घोषणा करते हुए नोबेल असेंबली ने कहा है एचआईवी की खोज ने दुनिया भर के वैज्ञानिकों को एक ख़तरनाक वायरस के बारे में समझने में मदद की है.
उनकी उस खोज के बाद ऐसे तरीक़ों की खोज की गई जिससे एचआईवी से प्रभावित लोगों का पता लगाया जा सके और उसे फैलने से रोका जा सके.
उस खोज ने नए उपचारों की दिशा में भी काम को बढ़ावा दिया.
एचआईवी का कोई इलाज अब तक नहीं मिला है मगर इस दिशा में हुए शोध ने कम से कम ये सुनिश्चित किया है कि इससे प्रभावित लोगों के लिए इसका मतलब तुरंत मौत नहीं है.
डॉक्टर मोंतानिए और अमरीका के एक शोधकर्ता रिचर्ड गालो दोनों को संयुक्त रूप से इस चीज़ का श्रेय दिया जाता है कि उन्होंने ही एचआईवी और एड्स के संबंध का पता लगाया था.
हालाँकि कई वर्षों तक दोनों के बीच इस बात को लेकर दावे-प्रतिदावे होते रहे. बाद में वैधानिक और यहाँ तक की फ़्रांस और अमरीका के बीच कूटनीतिक विवाद भी पैदा हो गया.
नोबेल पुरस्कारों की ज्यूरी ने गालो का कोई ज़िक्र नहीं किया है.
एचपीवी
नोबेल समिति ने एचपीवी और सर्वाइकल कैंसर के बीच के संबंध का पता लगाने के लिए प्रोफ़ेसर त्ज़ुर हाउज़न की तारीफ़ की है.
महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के 99.7% मामलों में एचपीवी ही पाया जाता है.
प्रोफ़ेसर त्ज़ुर हाउज़न के शोध ने वैज्ञानिकों को एचपीवी के टीके विकसित करने में मदद की. कई देशों में लाखों लड़कियों को वो टीके लगाए जाते हैं.