रविवार, 13 जुलाई, 2008 को 07:22 GMT तक के समाचार
लगभग अंधे होते मरीज़ों की आँखों की रेटिना के प्रत्यारोपण के प्रयोग से ज़्यादातर मरीजों की दृष्टि में सुधार देखा गया.
अमरीका के अनुसंधानकर्ताओं का कहना था कि नष्ट हो चुके भ्रूण से लिए गए रेटिना की कोशिकाओं को ऐसे मरीज़ों की आँखों में प्रत्यारोपित किया गया जिन्हें रेटिनिस पिगमेंटोसा (एक बीमारी जिसमें मरीज़ को दिखाई नहीं देता) या बढ़ती उम्र में ढीली पड़ी माँसपेशियों के कारण दिखाई नहीं देता था.
'द अमेरिकन जर्नल ऑफ़ ऑप्थेल्मोलॉजी' के अध्ययन में पाया गया कि दस में से सात मरीज़ों को इससे कुछ फ़ायदा हुआ. हालांकि उनकी दृष्टि इसके बाद भी गंभीर रूप से असामान्य थी.
ब्रिटेन के विशेषज्ञों का कहना है कि रेटिना का सफल प्रत्यारोपण विज्ञान का चमत्कार है.
बुज़ुर्गों में अंधेपन के लिए रेटिनिस पिगमेंटोसा या बढ़ती उम्र में ढीली पड़ी माँसपेशियॉ ही ज़्यादातर ज़िम्मेदार होती हैं.
इसमें प्रकाश को ग्रहण करने वाली आँख की रेटिना की कोशिकाएँ धीरे-धीरे ख़त्म होने लगती हैं.
सामान्य से कम
केंटुकी स्थित लुइसविले विश्वविद्यालय की इस टीम ने इस तकनीक में रेटिना की भ्रूण कोशिकाओं के साथ ऐसी कोशिकाओं को भी प्रत्यारोपित किया जो इन्हें स्वस्थ रखें.
इस परियोजना का नेतृत्व करने वाले डॉ नोर्मन राद्के ने मरीज़ों की दृष्टि की जॉच करने पर पाया कि दस में से तीन मरीज़ों की दृष्टि में कोई बदलाव नहीं था लेकिन बाकी सात मरीज़ों में हल्का सा सुधार था.
एक मामले में यह सुधार ऑपरेशन के छह सालों तक बना रहा जबकि उसी मरीज़ की दूसरी ऑख की दृष्टि निरंतर ख़राब होती गई.
हालांकि यह सुधार कुछ हद तक ही थे और उनकी दृष्टि सामान्य की अपेक्षा कम ही थी.
डॉ राद्के ने कहा, "इस तरीके को और सुधारने के बाद के प्रयोगों के निष्कर्षों के बाद मिले तथ्यों से हमने यही समझा कि रेटिना का प्रत्यारोपण रेटिना की क्षति में कारगर साबित हो सकता है."
नैतिक समस्या
हालांकि यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन इंस्टीट्यूट ऑफ़ ऑप्थेल्मोलॉजी के प्रोफ़ेसर पीट कॉफ़े ने कहा कि यह निष्कर्ष दृष्टि में महत्वपूर्ण सुधार के संकेत नहीं देते हैं.
उन्होंने कहा, "मैं यह नहीं कह सकता हूँ कि यह एक बड़ी सफलता है और अभी तक कोई भी रेटिना का पूर्णतया सफल प्रत्यारोपण नहीं कर पाया है जो इस क्षेत्र में एक बड़ा चमत्कार साबित होगा."
उन्होंने कहा कि भ्रूण कोशिकाओं का प्रयोग भी नैतिक वजह से और इसकी ज़रूरत से कम आपूर्ति के कारण व्यावहारिक नहीं है. यह स्टेम
सेल की तरह नहीं है. इसमें जब भी आपको नई कोशिकाएं चाहिए, एक नये भ्रूण की ज़रूरत होगी.