गुरुवार, 12 जून, 2008 को 21:28 GMT तक के समाचार
प्लूटो को सौर मंडल के नवें ग्रह की श्रेणी से हटाने के बाद अब खगोलशास्त्रियों ने उस जैसे कई ग़ैर-ग्रहों के लिए एक नई श्रेणी बना दी है.
इस नई श्रेणी का नाम दिया गया है 'प्लूटॉइड'.
दो साल पहले खगोलशास्त्रियों की अंतरराष्ट्रीय संस्था (आईएयू) ने प्लूटो को सौरमंडल के नौ ग्रहों से अलग करते हुए उससे ग्रह की पदवी छीन ली थी और कहा था कि उसमें ग्रह जैसे पूरे गुण नहीं हैं.
अब आईएयू ने ओस्लो में हुई एक बैठक के बाद कहा है कि नेप्च्यून के बाद या उससे दूर की कोई भी गोलाकार वस्तु होगी उसे 'प्लूटॉइड' कहा जाएगा.
आईएयू ही वह संस्था है जो सभी खगोलकीय नामों और उनकी श्रेणियों को अंतिम रुप देती है.
कारण
वर्ष 2006 में जब इस संस्था ने प्लूटो को ग्रह की श्रेणी से हटाने का फ़ैसला किया था तो इस पर पूरी दुनिया में बहुत शोर मचा था.
लेकिन संस्था का कहना था कि ऐसा करना इसलिए भी ज़रूरी था क्योंकि खगोलशास्त्रीय दुनिया नई तकनीक, ख़ासकर नए तरह के टेलीस्कोप आने से बदल गई है और दूर की चीज़ें भी आसानी से देखी जा रही हैं.
संस्था के वैज्ञानिकों का कहना था कि यदि ग्रहों और ग़ैर-ग्रहों या क्षुद्र-ग्रहों के बीच अगर विभाजन रेखा न खींची गई तो जल्दी ही सौर मंडल में 50 से ज़्यादा ग्रह हो जाएँगे.
इसके चलते ही खगोलशास्त्रियों ने सौरमंडल में नौ की जगह आठ ही ग्रह कर दिए थे.
अब सौरमंडल में बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, गुरु या वृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेप्च्यून ही रह गए हैं.
वैज्ञानिकों ने 'प्लूटॉइड' की श्रेणी में प्लूटो के अलावा इरिस को भी रखा है जो प्लूटो की तुलना में और दूर की कक्षा में रहते हुए सूर्य की परिक्रमा करता है.
संस्था ने कहा है कि जैसे-जैसे विज्ञान प्रगति करेगा और नई खोज होंगी और 'प्लूटॉइड' इसमें शामिल होते जाएँगे.
'प्लूटॉइड' की परिभाषा भी तय कर दी गई है और इसके लिए आकाशीय पिंड में गुरुत्वाकर्षण, गोलाकार होने जैसे गुणों के अलावा न्यूनतम चमक की शर्त भी रखी गई है.
सेरेस को 'प्लूटॉइड' की श्रेणी में नहीं रखा गया है क्योंकि यह मंगल और गुरु ग्रहों के बीच स्थित है और यह 'प्लूटॉइड' की परिभाषा की शर्तें पूरी नहीं करता.
हालांकि कुछ वैज्ञानिक आईएयू की इस अवधारणा को ख़ारिज करते हैं.
प्लूटो के अभियान पर काम कर रहे नासा के वैज्ञानिक एलन स्टर्न कहते हैं, "वे इसे प्लूटॉइड कह लें या हेमेरॉइड्स, यह अप्रासंगिक है."