शुक्रवार, 06 जून, 2008 को 12:14 GMT तक के समाचार
सिद्धार्थ प्रसाद
योग प्रशिक्षक, दिल्ली से
आजकल की दिनचर्या और जीवनशैली ऐसी होती जा रही है कि मोटापा बढ़ता ही जा रहा है. कारण चाहे खानपान में अनियमितता हो या देर तक बैठे रहना.
शारीरिक परिश्रम न होने के कारण कब्ज़ की समस्या बढ़ती जा रही है. जिससे पाचन क्रिया धीरे-धीरे अनियमित और जटिल होती जाती है.
ऐसा अधिक समय तक रहने से कमर दर्द की शिकायत हो जाती है. ज़मीन पर लेटकर किए जाने वाले पवनमुक्तासन और चक्रपादासन इतने सहज और सरल हैं कि आप इसे एक प्रयास में सीख सकते हैं.
महिला और पुरुष दोनों ही इनके अभ्यास से कब्ज़, गैस बनने, भूख न लगने जैसे पेट के रोगों से निज़ात पा सकते हैं.
इनका अभ्यास ठीक से करने से पेट और कमर की चर्बी कम होती है. मोटे लोग इन दोनों आसनों का भरपूर लाभ उठा सकते हैं.
पवनमुक्तासन
पीठ के बल लेट जाएँ, दोनों पैरों को मिलाकर रखें. अपने हाथों को शरीर के साथ सटाकर रखें और हथेलियों का रुख ज़मीन की ओर रखें.
सबसे पहले दाएँ पैर को घुटनों से मोड़ें और दायीं जाँघ को छाती की ओर लेकर आएँ. दोनों हाथों की अंगुलियों को आपस में मिलाकर घुटने से थोड़ा नीचे से पकड़ लें.
अब गहरी साँस भरें और साँस छोड़ते हुए पैर को छाती की ओर लेकर आएँ, थोड़ा दबाव देकर रखें. साँस बाहर रोककर रखें और सिर को ज़मीन से उठाते हुए अपने माथे को दाएँ घुटने से छूने का प्रयास करें.
बाएँ पैर को सीधा और तानकर रखें. दोनों पैरों की अंगुलियों को भी बाहर की ओर खींचकर रखें.
इस अवस्था में पाँच सेकंड तक रुकें रहें. इसके बाद साँस भरते हुए सिर को धीरे-धीरे ज़मीन पर लेकर आएँ और साँस छोड़ते हुए हाथों और पैरों को सीधी कर लें और पहले की स्थिति में वापस आ जाएँ.
यह पवनमुक्तासन का एक चक्र है.
इसी प्रकार दो बार दाएँ पैर से और दो बार बाएँ पैर से दोहराएँ.
पवनमुक्तासन की यह पहली अवस्था है. कुछ देर आराम करने के बाद साँस को सामान्य कर लें.
दूसरी अवस्था में पैरों को घुटनों से एक साथ मोड़ते हुए इस आसन का अभ्यास करें. पाँच सकेंड तक इस अवस्था में रुके रहें. आपकी नासिका ठुड्डी दोनों घुटनों के बीच में रहेगी. इसके बाद वापस आ जाएँ. इसे भी दो बार दोहराएँ.
हर राऊंड के बाद साँस को सामान्य कर लें और कुछ देर आराम करें.
सावधानियाँ: हाई ब्लडप्रेशर, श्याटिका और स्लिप डिस्क से पीड़ित लोग इस आसन का अभ्यास न करें.
क्या होगा फ़ायदा: पवनमुक्तासन कमर दर्द और पीठ की माँसपेशियों में तनाव को कम करता है. उनकी शक्ति को बढ़ाता है. कमर दर्द, कुछ देर खड़े रहने पर कमर में दर्द होना और थकान आदि में यह आसन काफ़ी लाभदायक है.
कब्ज़ दूर होती है, आँतों पर दबाव बढ़ने से गैस आदि की समस्या से भी छुटकारा मिलता है.
वे महिलाएँ जिन्हें मासिक धर्म की कोई समस्या हो वे इस आसन को अपनी दिनचर्या में शामिल कर लें, उन्हें लाभ मिलेगा.
सभी वर्ग के लोग पवनमुक्तासन का लाभ ले सकते हैं.
चक्रपादासन
पीठ के बल लेट जाएँ. दोनों पैर मिले हुए हों, हाथ सीधे रखें और हथेलियों को ज़मीन पर जंघाओं के साथ सटाकर रखें.
दायाँ पैर बगैर घुटने से मोड़ते हुए 15 सेमी ज़मीन से ऊपर उठाएँ और साँस भरते हुए दाएँ पैर को गोलाकार घुमाते हुए ऊपर की ओर लेकर आएँ और साँस छोड़ते हुए नीचे की ओर लाएँ. बड़े से बड़ा गोला बनाने का प्रयास करें.
इस प्रकार पाँच बार एक दिशा में और पाँच बार दूसरी दिशा में पैर को गोलाकार चलाएँ.
इसके बाद दाएँ पैर को वापस अपने स्थान पर लेकर आएँ साँस को सामान्य कर लें.
पेट की माँसपेशियों पर आपने जो खिंचाव महसूस किया है उसे साँस छोड़ते हुए ढीला छोड़ दें.
इस प्रकार पाँच बार बाएं पैर से भी दोनों दिशाओं में गोलाकार चलाएँ और कुछ पल आराम करें. यह चक्रपादासन की पहली अवस्था है.
दूसरी अवस्था में दोनों पैरों को एक साथ गोलाकार घुमाएँ. इसे अपनी शक्ति के अनुसार ही करें.
विशेष: आसन करते हुए पैर को सीधा रखें, घुटनों से न मोड़े. दोनों हथेलियों को जंघाओं के साथ सटाकर रखें. सिर को भी न उठाएँ.
दोनों पैरों को एक साथ गोलाकार घुमाने पर पेट पर ज़्यादा दबाव और खिंचाव पड़ता है. इसलिए इसे अपनी शक्ति के अनुसार ही करें.
चक्रपादासन करने के दौरान और बाद में भी कुछ देर तक आराम करें. आँखें बंद रखें और अपना पूरा ध्यान साँस की ओर लगाकर रखें. थोड़ी ही देर में आपका पूरा शरीर शिथिल और मन शांत हो जाएगा.
सावधानी: जिनका हाल ही में किसी प्रकार का ऑपरेशन हुआ है या पहले से कमर दर्द से परेशान हैं, ऐसे लोग किसी कुशल योग प्रशिक्षक की सलाह के बिना कोई अभ्यास न करें.
फ़ायदा: मोटे लोगों के लिए यह आसन विशेष रूप से लाभदायक है. पेट और कमर के आसपास की चर्बी इसके अभ्यास से घटती है.
पेट और पीठ की माँसपेशियों की शक्ति बढ़ती है. कब्ज़ दूर होता है, जिससे पाचन संबंधित सभी रोगों में लाभ होता है.
(योग प्रशिक्षक सिद्धार्थ प्रसाद का विशेष कार्यक्रम आप हर शनिवार और रविवार सुन सकते हैं सुबह साढ़े छह बजे बीबीसी हिंदी सेवा के 'आज के दिन' कार्यक्रम में. यह कार्यक्रम और यह लेख आपको कैसा लगा. आप अपनी राय हमें hindi.letters@bbc.co.uk पर भेज सकते हैं)