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शनिवार, 24 मई, 2008 को 08:07 GMT तक के समाचार

डेविड शुकमैन
पर्यावरण संवाददाता, बीबीसी न्यूज़

आर्कटिक के ग्लेशियरों में बड़ी दरार

कनाडा की सेना के साथ आर्कटिक की यात्रा पर गए वैज्ञानिकों का कहना है कि वहाँ बर्फ के विशालकाय हिमखंड तेज़ी से पिघल रहे हैं.

वैज्ञानिकों ने हिमखंडों में नई दरारें खोजी हैं जो 16 किमी से ज़्यादा लंबाई में फैली है. लगभग दो टुकड़ों में बँट चुके ये हिमखंड कभी भी एक-दूसरे से अलग हो सकते हैं.

इसे जलवायु परिवर्तन का ही नतीजा माना जा रहा है.

वैज्ञानिकों के दल को कनाडा के उत्तरी इलाक़े की सबसे बड़ी आईस सेल्फ़ 'वार्ड हंट' में दरार की यह श्रृंखला दिखी है.

यह विशालकाय हिमखंड इलाक़े में बर्फ़ का सबसे बड़ा टुकड़ा है. इसमें आई बड़ी दरार को जलवायु परिवर्तन के असर के महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है.

ओंटारियो के ट्रेंट विश्वविद्यालय से जुड़े वैज्ञानिक दल के सदस्य डेरेक म्यूलर कहते हैं, "इन नई दरारों को देखकर मैं तो हक्का-बक्का रह गया."

वे बताते हैं, "इसका मतलब यह है कि आईस शेल्फ़ दरक रही है. ये दिख तो एक साथ रहे हैं लेकिन ये अलग-अलग बह सकते हैं."

बदलते नक्शे

ओत्तावा विश्वविद्यालय के डॉ. ल्युक कॉपलैंड भी इस वैज्ञानिक दल के सदस्य हैं. इनके मुताबिक़ यह दरार आर्कटिक में आ रहे बदलावों के ढर्रे को बयाँ करता है.

वे कहते हैं, "हम ग्लेसियर के घटने से लेकर समुद्री बर्फ के पिघलने के बहुत सारे नाटकीय बदलाव देख रहे हैं."

कॉपलैंड बताते हैं, "हमारे पास पिछले साल के मुक़ाबले 23 फ़ीसदी कम समुद्री बर्फ़ है. आईस शेल्वज़ के साथ जो हो रहा है, यह उसी का हिस्सा है."

जब आईस शेल्वज़ टूटते हैं तो वे समुद्र में बर्फ़ के किसी द्वीप जैसी शक्ल ले लेते हैं. इससे समुद्र का तटीय नक्शा ही बदल जाता है.

पिछले साल बीबीसी की उस टीम में मैं भी था जो डॉ. म्यूलर और डॉ. कॉपलैंड के साथ "आयल्स बर्फ़द्वीप" पर की गई पहली शोध में साथ गए थे.

क्या होगा इस साल?

आयल्स बर्फ़द्वीप इतने बड़े क्षेत्र में फैला है जितने बड़े में मैनहट्टन शहर.

उसी समय से यह दो हिस्सों में बँट रहा है. आज की तारीख़ में दोनों ही विशालकाय हिस्से अपनी मूल जगह से 640 किलोमीटर दूर पहुँच चुके हैं.

आर्कटिक में लगातार आ रहे बदलावों के कारण क्षेत्र पर अधिकार को लेकर विवाद पैदा हो रहे हैं.

कनाडा की सेना जिस यात्रा पर गई थी उसे "संप्रभुता गश्ती" का नाम दिया गया.

पिछले साल आर्कटिक में बर्फ़ के पिघलने के रिकॉर्ड के बाद सबकी नज़र इस बात पर टिक गई है कि इस साल गर्मी के मौसम में क्या होता है.