बुधवार, 21 मई, 2008 को 16:09 GMT तक के समाचार
एक ताज़ा अध्ययन में यह बात सामने आई है कि उन पुरुषों में हृदय संबंधी गंभीर बीमारियों का ख़तरा ज़्यादा रहता है जो डायबटीज़ यानी मधुमेह और यौन उत्तेजना को बरक़रार नहीं रख पाने की बीमारी से एक साथ ग्रसित हैं.
अध्ययन के मुताबिक़ यौन उत्तेजना को बरक़रार नहीं रख पाने की बीमारी से ग्रसित लोगों में, उन लोगों की तुलना में हृदय संबंधी बीमारियों के होने का ख़तरा दोगुना रहता है जो डायबिटीज़ से ग्रसित हैं.
इस ताज़ा शोध को करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि रक्त में शर्करा की मात्रा ज़्यादा होने की वजह से रक्त की कोशिकाओं के नष्ट होने के कारण ये ख़तरा बढ़ जाता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि यौन उत्तेजना को बरक़रार नहीं रख पाने की बीमारी से ग्रसित लोगों को इलाज अवश्य करवाना चाहिए.
पिछले अध्ययनों में यह बात सामने आई थी कि टाईप-टू डायबटीज़ की बीमारी से ग्रसित लोगों को हृदय संबंधी बीमारियाँ होने से क़रीब तीन वर्ष पहले से ही आमतौर पर यौन संबंधी बीमारी होती है.
ख़तरा दोगुना
इस नए अध्ययन में बीमारियों के इस संबंध को विस्तार से जाँचा-परखा गया है. कुल 2306 लोगों के एक समूह पर यह अध्ययन किया गया.
इनमें क़रीब छह सौ लोग पहले से यौन उत्तेजना को बरक़रार नहीं रख पाने की बीमारी से ग्रसित थे लेकिन किसी भी पुरुष में हृदय संबंधी किसी भी प्रकार की बीमारी का कोई लक्षण नहीं था.
चार वर्ष के बाद इनमें से 123 लोगों को किसी न किसी प्रकार की हृदय संबंधी बीमारियों से जूझना पड़ा.
अध्ययन के मुताबिक़ जो लोग यौन रोगों से ग्रसित थे उनमें सामान्य लोगों के मुक़ाबले हृदय संबंधी बीमारियों के होने का ख़तरा दोगुना था.
चाइनीज़ यूनिवर्सिटी ऑफ़ हांगकांग के प्रमुख शोधकर्ता डॉक्टर पीटर छुन-यिप तोंग ने कहा, "उत्तेजना को बरक़रार नहीं रख पाने की बीमारी से ग्रसित लोगों और हृदय संबंधी बीमारियों से ग्रसित लोगों को स्वास्थ्य सेवा मुहैया करवाने वालों को इस बारे में सचेत रखना चाहिए."
एक अन्य शोध में इटली के चार स्वास्थ्य केंद्रों पर 300 ऐसे लोगों का अध्ययन किया गया जो डायबटीज़ से ग्रसित थे, साथ ही जिनमें हृदय संबंधी बीमारियाँ प्रारंभिक अवस्था में थीं.
इनमें से 118 लोग अध्ययन के आरंभ में यौन उत्तेजना को बरक़रार नहीं रख पाने की बीमारी से ग्रसित थे लेकिन चार वर्षों के बाद पाया गया कि उनमें गंभीर हृदय रोगों के होने की संभावना दोगुनी थी.
यह अध्ययन भी हांगकांग यूनिवर्सिटी के अध्ययन की पुष्टि करता है.