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शनिवार, 17 मई, 2008 को 12:30 GMT तक के समाचार

जोनाथन फिल्डेस
विज्ञान एवं तकनीक संवाददाता, बीबीसी न्यूज़

सौ डॉलर वाले लैपटॉप के सॉफ़्टवेयर की जंग

विकासशील देशों के बच्चों के लिए सौ डॉलर यानी चार हज़ार रुपए के लैपटॉप का सॉफ़्टवेयर बनाने की जंग माइक्रोसॉफ़्ट के मैदान में उतर आने से रोचक हो गई है.

'एक्स ओ' नाम से प्रसिद्ध कम क़ीमत वाले लैपटॉप का सॉफ़्टवेयर बनाने के काम में अब 'शुगर लैब्स' नाम की संस्था भी हाथ आजमाने जा रही है.

कुछ दिन पहले ही सौ अमरीकी डॉलर में बच्चों को कम्प्यूटर मुहैया कराने वाली संस्था 'वन लैपटॉप पर चाइल्ड' (ओएलपीसी) ने इन कम्प्यूटरों को विंडोज़ एक्सपी से लैस करने के लिए कम्प्यूटर क्षेत्र की दिग्गज कंपनी माइक्रोसॉफ़्ट से हाथ मिलाया था.

इसका मतलब यह है कि इन कम्प्यूटरों पर विंडोज के साथ-साथ दूसरे ऑपरेटिंग सिस्टमों के भी काम करने का विकल्प खुला रहेगा.

इस कम्प्यूटर की माँग कर रहे देश इसे विंडोज से लैस करने की माँग कर रहे थे और इसलिए यह क़दम उठाया गया है.

इसी साल जून महीने से 'चार से पाँच' देशों में इन कम्प्यूटरों का परीक्षण शुरू होने की उम्मीद है.

शुगर लैब्स की शुरुआत

कभी 'वन लैपटॉप पर चाइल्ड' से जुड़े रहे वाल्टर बेंडर ने शुगर लैब्स की स्थापना की है और इस संस्था ने 'शुगर' नाम के अपने इंटरफेस को 'अगले दौर की उपयोगिता' के लिए विकसित करना शुरू कर दिया है.

इस संस्था ने इरादा जताया है कि यह अपने सॉफ़्टवेयर को मुफ़्त में मुहैया कराएगी जो एक्स ओ जैसे कम्प्यूटर पर काम करेगी.

'वन लैपटॉप पर चाइल्ड' के कम्प्यूटरों पर शुगर लैब्स के इंटरफेस भी उपलब्ध होंगे.

वाल्टर बेंडर कहते हैं, "हम ओएलपीसी के साथ काम करना जारी रखेंगे लेकिन साथ ही हम दूसरे निर्माताओं के साथ भी हाथ मिलाएँगे."

उनका कहना है, "उम्मीद है कि इस विचार का उन इलाक़ों में तेज़ी से फ़ैलाव होगा और इसका लाभ और समुदायों को भी मिलेगा."

अलग-अलग विचार

कुछ दिन पहले तक बेंडर ओएलपीसी में दूसरे नंबर के अधिकारी थे. एक्स ओ कम्प्यूटर के सॉफ़्टवेयर और उस पर दी जाने वाली सुविधाओं की जवाबदेही इन्हीं पर थी.

अप्रैल महीने ही ही बेंडर ने संस्था के प्रमुख से मतभेदों को लेकर इस्तीफ़ा दे दिया था.

उनका कहना है कि माइक्रोसॉफ़्ट के साथ ओएलपीसी का सौदा उनके संस्था छोड़ने का कारण नहीं बल्कि उनके संस्था छोड़ने का लक्षण है.

वे कहते हैं, "मैंने ओएलपीसी इसलिए छोड़ा क्योंकि लोगों को, ख़ासकर बच्चों को, पठन-पाठन के बारे में बताना ज़्यादा महत्वपूर्ण था."

उन्होंने कहा कि उन्हें यह स्वीकार करने में कोई झिझक नहीं है कि विकासशील देशों के बच्चों को शिक्षित करने के बेहतर उपायों पर संस्था के संस्थापक निकोलस नेग्रोपोंटे से उनके विचार मेल नहीं खा रहे थे.

बेंडर कहते हैं, "एक मक़सद तो यह हो सकता है कि आप बच्चों को ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में लैपटॉप मुहैया कराएँ. यही निकोलस का स्पष्ट लक्ष्य है."

लेकिन बेंडर के पास इस काम को करने का एक दूसरा नज़रिए भी है.

वे कहते हैं, "मेरा तरीक़ा यह है कि दुनिया को बता दो कि किस तरह से ये शिक्षा दी जा सकती है जिसका ज़्यादा असर होगा. इसके लिए सिर्फ़ लैपटॉप उपलब्ध करवा देना अकेला रास्ता नहीं है."

उन्हें लगा कि ओएलपीसी निकोलस के लक्ष्यों की ओर बढ़ रही है और उनका ध्येय पीछे छूट रहा है और इसलिए उन्होंने अपना रास्ता अलग कर लिया.

क्या है शुगर

शुगर ऑपरेटिंग सिस्टम बच्चों को अलग-अलग कम्प्यूटरों पर काम करते हुए एक साथ जोड़े रखने में सक्षम इंटरफेस है.

इस पर बच्चे लिख सकते हैं और संगीत भी तैयार कर सकते हैं.

वे कहते हैं, "बच्चों को सीखने का बेहतर अनुभव देने के लिए कम्प्यूटर में वह सॉफ़्टवेयर ज़रूरी है जो उन तमाम गतिविधियों का साथ देता हो जो सीखने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देती हैं."

उनकी साफ़ सोच है कि शुगर लैब्स अपने लक्ष्य को पाने के लिए दूसरे कम्प्यूटर निर्माताओं के साथ भी हाथ मिलाएगा.

इस बीच ओएलपीसी ने कहा है कि वह शुगर के विकास का काम 'तीसरी पार्टी' की मदद से जारी रखेगा और विंडोज एक्सपी का संस्करण भी तैयार करेगा.

हालाँकि वे कहते हैं कि वे ओएलपीसी के काम का समर्थन नहीं करते हैं लेकिन बेंडर का कहना है, "मैं यह साफ़ कर देना चाहता हूँ कि यह ओएलपीसी के ख़िलाफ़ नहीं बल्कि उससे जुड़ा हुआ है."