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बुधवार, 30 अप्रैल, 2008 को 03:42 GMT तक के समाचार

डटकर खाओ फिर भी पतले!

ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने वज़न कम करने की एक ऐसी तकनीक खोज निकाली है जिससे खाने-पीने में कटौती करने की ज़रुरत नहीं होगी.

शोधकर्ताओ का कहना है कि चूहों पर किए गए प्रयोग में उन्होंने पाया कि मोटापे के लिए ज़िम्मेदार कोशिकाओं में फ़ेरबदल करके मेटाबॉलिज़्म यानी चयापचय को तेज़ किया जा सकता है.

वैज्ञानिकों ने पाया कि एक विशेष एंजाइम को हटा देने या निष्क्रिय से चूहे ने उतना ही खाना खाया जितना दूसरे चूहों ने खाया लेकिन उसके वज़न में अपेक्षाकृत कम बढ़ोत्तरी हुई.

उम्मीद की जा रही है कि इस पद्धति से वज़न कम करने की दवा विकसित करने में सहायता मिलेगी और इससे मधुमेह यानी डायबिटीज़ से निपटने में भी सहयोग मिलेगा.

शोध

वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन चूहों में एंजाइम को हटाया गया उनका वज़न दूसरे चूहों से 20 प्रतिशत कम था और उनके शरीर में मोटापा के तत्व 60 प्रतिशत तक कम था.

मेटाबॉलिज़्म तेज़ होने के कारण उनमें डायबिटीज़ होने की आशंका भी कम हो गई क्योंकि उनके शारीरिक तंत्र ने शरीर में मौदूज शर्करा को ज़्यादा तेज़ी से विघटित कर लिया.

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह एंजाइम मनुष्यों में भी पाया जाता है और इसको निष्क्रिय करके उच्च रक्तचाप से भी निपटा जाता है.

उनका दावा है कि इस शोध के आधार पर वज़न कम करने की दवा विकसित की जा सकेगी.

लेकिन सवाल यह है कि जो प्रयोग चूहों पर किए गए हैं क्या वे मनुष्यों पर भी कारगर होंगे?

'वेट कंसर्न' संस्था के मेडिकल निदेशक डॉक्टर इयान कैंपबेल का कहना है कि यह शोध दिलचस्प तो है लेकिन इसका प्रयोग अभी सिर्फ़ चूहों पर किया गया है.

उनका कहना है कि एंजाइम को निष्क्रिय करके या उसका विन्यास बदलकर उच्च रक्तचाप से तो निपटा जा सकता है लेकिन इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि इस दवा की ख़ुराक बढ़ाकर मनुष्यों का वज़न कम किया जा सकता है.

हालांकि यह दवा सुरक्षित है लेकिन इसका एक नुक़सान यह हो सकता है कि गुर्दा यानी किडनी ख़राब होने लगे.

डॉक्टर कैंपबेल का कहना है, "लगता नहीं कि यह संभव होगा कि कोई ज़्यादा खाए और फिर भी उसका वज़न न बढ़े."

उनका कहना है, "जो सबूत उपलब्ध हैं उससे साफ़ है कि अच्छे भोजन और नियमित व्यायाम का कोई विकल्प नहीं है चाहे आप वज़न कम करने की दवा लें या न लें."