एक अध्ययन से संकेत मिले हैं कि चिड़ियाघर में रखे गए बहुत से बाघ असली नस्ल के वंशज हैं जो ख़त्म हो रही प्रजातियों को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.
आनुवांशिक पृष्ठभूमि का पता लगाने के लिए एक नए तरीक़े का इस्तेमाल कर रहे एक दल ने पाया कि बहुत से 'वंशीय' जानवर दरअसल असली नस्ल की उप प्रजाति हैं.
‘करंट बायोलॉजी’ में छपा है कि इन बाघों में ऐसे आनुवांशिक लक्षण पाए गए हैं जो जंगली बाघों में नहीं मिलते.
ताज़ा अंदाज़ के मुताबिक जंगलों में सिर्फ़ तीन हज़ार बाघ ही बचे हैं.
इसके विपरीत, शोधार्थियों की अंतरराष्ट्रीय टीम ने पाया कि दुनियाभर में क़ैद करके रखे गए बाघों की संख्या 15 हज़ार से लेकर 20 हज़ार तक है.
लेकिन उन्होंने इसका विशेष रूप से उल्लेख किया कि इनमें से सिर्फ़ एक हज़ार बाघ ही ऐसे हैं जो जानवरों की विभिन्न असली नस्लों को सुरक्षित रखने के लिए चलाए जा रहे आनुवांशिक कार्यक्रम के साथ जुड़े रह सके.
इस दौरान बाघों की नस्ल को सुरक्षित रखने के उपायों की भूमिका पर बहस हुईं कि क्या जानवरों को कैद में रखना प्राकृतिक पशुसंख्या को उचित आनुवांशिक सुरक्षा देता है और इन नस्ली बाघों का महत्व क्या इनकी प्रजातियों को सुरक्षित रखने में है?
क़ैद में सुरक्षित नस्लें
चिड़ियाघर में रखे गए 105 बाघों के डीएनए नमूनों का 20 बरस तक अध्ययन करने और परिचित नस्ल के बाघों की जानकारी का संदर्भ के रूप में प्रयोग करने के बाद यह दल असली उप प्रजाति से मिलान का संकेत देने वाले आनुवांशिक लक्षणों का पता लगाने में सफल हो सका.
यूएस नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट की सह लेखिका डॉक्टर शू जिन लुओ ने कहा, "प्रमाणित उप प्रजाति वंश (वीएसए) निर्धारण से हमें बहुत आसानी हुई."
उन्होंने कहा कि जब हमने अज्ञात पृष्ठभूमि वाले बाघों पर इसे आज़माया तो इससे असली नस्ल के बाघों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई जो संरक्षण प्रबंध के लिए उपयुक्त थे.
अध्ययन किए गए 105 बाघों में से शोधार्थियों ने 49 को चुना जो असली उप प्रजातियों से संबद्ध थे.
उनके अनुसार, "अगर वर्तमान में कैद में मौजूद 15 हज़ार बाघों में से 23 फ़ीसदी वीएसए साबित हो जाएं तो असली नस्ल वाले ऐसे बाघों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी जो संरक्षण के लिए उपलब्ध हैं."
उन्होंने कहा, "हमें यह भी पता लगा कि इन बाघों में से कुछ में आनुवांशिक विविधता मौजूद थी जो जंगली बाघों में ज़्यादातर गायब थी."
इस दल ने निष्कर्ष निकाला कि उनकी खोज यह संकेत देती है कि इन बाघों के लिए चलाया जाने वाला एक व्यापक कार्यक्रम ही इन जंगली जानवरों की नस्ल को सुरक्षा और लंबा जीवन दे सकता है.
उनके अनुसार, "ऐसा कार्यक्रम ही इनकी संख्या में वृद्धि करने के साथ आनुवांशिक विविधता को बनाए रखने और ख़त्म होती जा रही इनकी प्रजातियों को संरक्षित रखने में मदद कर सकता है."