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शनिवार, 19 अप्रैल, 2008 को 01:28 GMT तक के समाचार

सिद्धार्थ प्रसाद, योग प्रशिक्षक
दिल्ली से

योग: आंखों और चेहरे के लिए आसन

अंग्रेज़ी में कहते हैं 'फ़ेस इज़ दि इंडेक्स ऑफ़ माइंड' यानी चेहरा बता देता है दिल की बात. जी हां आपका चेहरा आपके व्यक्तित्व का आईना है. अगर आप मन से परेशान हैं तो चेहरे पर वैसे ही भाव आएंगे और अगर आप खुश हैं तो चेहरा भी खिला हुआ रहेगा.

दिनभर के काम से आंखों का थक जाना, सर्दी या एलर्जी के कारण नाक का बंद होना, गालों पर कील मुहांसे ये ऐसे कुछ कारण हैं जिनसे हमें परेशानियां झेलनी पड़ती हैं. इनसे निज़ात पाने के लिए आइए कुछ अभ्यास सीख लें.

पॉमिंग

विधि- किसी भी आरामदायक स्थिति में बैठें और कुछ पल के लिए आंखें बंद कर लें. दोनों हथेलियों को आपस में तेज़ी से रगड़ें ताकि वे गरम हो जाएं.

उसके बाद दोनों हथेलियों को आंखों की पलकों पर रखें और हाथ की ऊर्जा को बंद आंखों से धारण करें. कुछ ही पल में आप आराम महसूस करेंगे.

जब तक हथेलियों की गर्मी को महसूस करें तब तक इसी अवस्था में रुकें. उसके बाद हथेलियों को हटा लीजिए.

आंखें बंद ही रखें और इस क्रिया को तीन बार दोहराएं.

विशेष- अंगुलियों से आखों पर दाबाव न डालें सिर्फ़ हथेलियों के बीच के भाग से ही आंखों को ढकें.

लाभ- जब भी आप पढ़ाई करते समय, टेलीविज़न देखने के बाद, कंप्यूटर पर काम करने पर या किसी भी कारण से आंखों में तनाव महसूस करें तब इस क्रिया का अभ्यास किया जा सकता है. ऐसा करने पर आपकी आंखों की थकान दूर होगी और तनाव से भी मुक्ति मिलेगी.

कपोल शक्ति विकासक

विधि- सर्वप्रथम दोनों हाथों की अंगुलियों के अग्रभाग को आपस में मिलाते हैं. तत्पश्चात दोनों अंगूठों से दोनों नासिका यानी नाक के द्वार को बंद करते हैं.

दोनों कोहनियों को कंधों की सीध में रखते हैं.

अब मुंह को छोटा यानी चोंच की तरह बनाते हुए सांस लेते हैं, गाल फुलाते हैं और ठु़ड्डी को छाती से लगाते हैं. छोटी अंगुली छाती से स्पर्श करेगी.

कुछ पल के लिए आंखें बंद करते हैं. यथासाध्य इस अवस्था में पांच से छह सेकेंड साँस रोककर रखते हैं.

साँस न रोक पाने की स्थिति में आंखें खोलते हैं, गर्दन सीधी करते हैं, अंगूठों को नाक से हटाते हैं और बिना किसी आवाज़ के सांस को धीरे-धीरे बाहर निकाल देते हैं.

इस क्रिया को पाँच बार दोहराया जा सकता है.

विशेष- साँस को ज़बर्दस्ती न रोकें. हृदय रोगी और जिनका ब्लड प्रेशर ज़्यादा हो वे इस क्रिया को न करें.

जिन्हें गर्दन में दर्द है वे गर्दन आगे नहीं झुकाएंगे. वे बिना गर्दन झुकाए इसका अभ्यास कर सकते हैं.

लाभ- इस क्रिया के अभ्यास से पिचके हुए गाल भर जाते हैं. झुर्रियां दूर होती हैं. गाल स्वाभाविक अवस्था में आ जाते हैं.

कपोल यानी गाल पर होने वाले मुहांसे, फुंसियां आदि का निकलना बंद हो जाता है और गाल पर लाली छा जाती है.

कपोल शक्ति विकासक के अभ्यास से बंद नाक भी खुलती है. संभव हो तो किसी योग प्रशिक्षक से या किसी योगकेंद्र में जाकर शोधन क्रियाएं जैसे नेति आदि भी सीखनी चाहिए.