रविवार, 13 अप्रैल, 2008 को 08:05 GMT तक के समाचार
अमरीका में किए गए एक ताज़ा शोध में पता चला है कि आम तौर पर एनेस्थीसिया यानी बेहोशी के लिए प्रयोग में लाई जाने वाली दवा ऑपरेशन के दौरान होने वाले दर्दनाक अनुभवों से बचाती हैं.
पत्रिका ‘न्यू साइंटिस्ट’ में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़ कैलीफ़ोर्निया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि सेवोफ़्ल्युरेन नामक गैस मरीज़ को दर्दनाक तस्वीरों को याद रखने से है.
शोध के दौरान किए गए स्कैन से पता चला है कि एनेस्थीसिया मस्तिष्क के दो प्रमुख क्षेत्रों के बीच उस दौरान तरंगों को रोकता है.
ऐसा माना गया है कि एनेस्थीसिया देने के बाद मरीज़ सर्जरी यानी शल्य चिकित्सा के दौरान हुए अनुभवों को आख़िर में याद नहीं रख सकता.
हालाँकि एनेस्थीसिया युक्त दवाओं का प्रयोग मरीज़ को ऑपरेशन के पहले केवल बेहोश करने के लिए किया जाता है. शरीर पर उसका पड़ने वाला प्रभाव अक्सर काफ़ी जटिल होता है.
विज्ञान पत्रिका ‘प्रोसीडिंग्स ऑफ़ द नेशनल एकेडमी ऑफ़ साइंस’ ने कैलीफ़ोर्निया के शोधकर्ताओं के हवाले से बताया है कि वैज्ञानिक सर्जरी के दौरान इस गैस के कम प्रयोग के प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं.
उन्होंने अपने प्रयोगों के दौरान लोगों को पहले एनेस्थीसिया या प्लेसिबो गैस दी, और फिर उन्हें कुछ तस्वीरें दिखाईं.
उनमें से कुछ को रोज़ाना प्रयोग मे लाई जाने वाली चीजें मसलन कॉफ़ी का कप और कई दूसरे लोगों को शक्तिशाली या भावनाओं को उकसाने वाली जैसे ख़ून से लथपथ हाथ की तस्वीरें दिखाई गईं.
फिर एक हफ़्ते के बाद उन लोगों को तस्वीरें याद करने के लिए कहा गया.
जिन लोगों को सेवोफ़्ल्युरेन नामक गैस नहीं दी गई थी वो क़रीब 29 प्रतिशत शक्तिशाली और केवल 12 प्रतिशत दूसरी तस्वीरें याद रख पाए.
जबकि वो लोग जिन्हें सेवोफ्ल्युरेन गैस दी गई वो केवल 5 प्रतिशत संवेदनशील और 10 प्रतिशत दूसरी तस्वीरें याद रख सके.
दिमाग़
दिमाग़ का स्कैन करने यानी जाँच से पता चला कि ये गैस एमिग्डाला और हिप्पोकैंपस के हिस्से पर रुकावट पैदा करता है. दिमाग़ के इन हिस्सों में ही याददाश्त होती है और भावनाओं के चित्र बनते हैं.
शोधकर्ता ने पत्रिका में लिखा, “ये शोध एक कारक और प्रक्रिया की खोज के बारे में बताते हैं जो मानव की भावनात्मक याददाश्त को रोक देता है.”
उन्होंने ऐसे कई तरीक़ों के बारे में बताया जिनसे ऐसा होने से रोका जा सकता है और मरीज़ उस अवस्था के दौरान किए गए अनुभवों को भी याद कर सकता है.
ये भी बताया गया कि गैस उन तकलीफ़देह अनुभवों को रोकने के दौरान पहले की याददाश्त पर कोई अच्छा या बुरा असर नहीं डालती.
कैंब्रिज विश्वविद्यालय के डॉक्टर एंथोनी अब्सालोम का कहना है कि एनेस्थीसिया वाली दूसरी दवाओं से याददाश्त के निर्माण में दखल पाई जाती है.
“अगर व्यक्ति कष्टदायक प्रक्रिया से गुज़रता है यानी उसे एनेस्थीसिया नहीं दिया गया है लेकिन दर्द दूर करने वाली दवाएं दी गई हों तो मरीज़ ज़्यादा आराम से रहता है लेकिन उससे उन्हें बाद में याद न रखने में मदद होती है.”
इसी तरह की प्रक्रिया आईसीयू यानी इंटेंसिव केयर यूनिट में अपनाई जाती है जहाँ मरीज़ लंबे समय तक नलियों के सहारे जीवित रहता है.
उन्होंने कहा, “पांच हज़ार में से क़रीब एक व्यक्ति को आपरेशन की जानकारी याद रहती है और ऐसा क्यों होता है ये समझना कठिन है लेकिन इस तरह के शोध मददगार हो सकते हैं.”