मंगलवार, 08 अप्रैल, 2008 को 11:09 GMT तक के समाचार
यूरोपीय देशों में हवाई यात्रा के दौरान मोबाइल फ़ोन पर बात करने की मनाही नहीं होगी.
यूरोपीय आयोग के नए नियमों के तहत मोबाइल फ़ोन कॉल पर लगी पाबंदी हटा ली गई है.
फ़ैसले का मतलब यह है कि हवाई जहाज़ के तीन हज़ार मीटर की ऊंचाई पर पहुँचने के बाद यात्रियों को कॉल करने की अनुमति होगी.
छह महीने के विचार-मंथन के बाद इसे मंज़ूरी दी गई है. उम्मीद है कि इस तरह की पहली सेवा अगले महीने शुरू हो सकती है.
यूरोपीय आयोग के टेलीकॉम आयुक्त विवियन रेडिंग ने मोबाइल ऑपरेटरों को चेतावनी दी है कि वे विमान से किए जाने कॉलों की दर उचित स्तर पर रखें.
'झटके न दें बिल...'
उन्होंने कहा, "अगर उपभोक्ता को झटके देने वाले बिल आएँगे तो यह सेवा नहीं चल पाएगी."
रेडिंग कहते हैं, "एयरलाइनों और ऑपरेटरों से मेरा कहना है कि वो ऐसी सुविधाएँ मुहैया कराएँ जिससे उड़ान के दौरान संचार सेवा का उपयोग करने वालों से दूसरे यात्रियों को दिक्कत न हो."
उड़ान के दौरान सुरक्षित रूप से मोबाइल पर बातें हो सकें, इसकी तकनीकी ज़रूरतों को अपनाने के लिए आयोग ने नए नियम बनाए हैं.
आयोग इस कोशिश में है कि इस सेवा के लिए किसी एयरलाइन को एक सदस्य देश से जारी लाइसेंस को पूरे यूरोप में मान्यता मिले.
अब इस सेवा को मुहैया कराने का गेंद निजी एयरलाइनों के पाले में चला गया है.
हालाँकि इस सेवा को पूरी तौर पर मंज़ूरी तभी मिलेगी जब यह दूसरी नियामक बाधाएँ भी पार कर ले.
यूरोपीय विमानन सुरक्षा एजेंसी से अभी तक ऐसे किसी उपकरण की मंज़ूरी बाक़ी है.
कैसे होगी हवा में बात...?
इस सेवा की चलन में लाने के लिए विमान पर मोबाइल फ़ोन का एक बेस स्टेशन बनाया जाएगा. इसे 'पिको सेल' कहते हैं.
विमान के उड़ान भरने के बाद पिको सेल को चालू कर दिया जाएगा जो विमान के अंदर और बाहर नेटवर्क कवरेज़ का घेरा तैयार कर देगा.
उड़ान के दौरान होने वाले कॉल पिको सेल की मदद से धरती पर उपलब्ध मोबाइल नेटवर्क से जुड़ेंगे.
पूरे यूरोप में इस तकनीक के लिए मोबाइल स्पेक्ट्रम तैयार है लेकिन विमान के यूरोपीय सीमा से बाहर जाते ही यह सेवा बंद हो सकती है.
यूरोपीय टेलिकॉम आयुक्त के प्रवक्ता मार्टिन सल्मायर ने कहा, 'विमान के पायलट इस सेवा को उड़ान के दौरान ज़रूरत महसूस होने पर बंद कर सकेंगे.'
माना जा रहा है कि फ़्रांसीसी विमान कंपनी 'एयर फ़्रांस' इस तकनीक को अपने विमान में लगाने की तैयारी कर चुकी है.
हवा में मोबाइल रहना ज़मीन की तुलना में कुछ महँगा होगा लेकिन यह ज़्यादा न हो इसके लिए आयोग ने ऑपरेटरों को हिदायत दी है.