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शुक्रवार, 04 अप्रैल, 2008 को 00:03 GMT तक के समाचार

'ला नीना' के कारण यह साल ठंडा रहेगा

विश्व के मुख्य मौसम वैज्ञानिक का कहना है कि प्रशांत महासागर में सक्रिय 'ला नीना' धाराओं की ठंडक के कारण यह साल 2007 की तुलना में ठंडा रहेगा.

संयुक्त राष्ट्र के मौसम संगठन के महासचिव माइकल जराउद ने बीबीसी को बताया कि संभावना है कि 'ला नीना' इस साल गर्मियों के दौरान भी सक्रिय रहेगा.

उल्लेखनीय है कि 'ला नीना' और 'एल नीनो' प्रशांत महासागर की दो प्राकृतिक धाराएँ हैं और इनका असर दुनिया भर को प्रभावित करता है.

'एल नीनो' से तापमान बढ़ता है जबकि 'ला नीना' से तापमान में कमी आती है.

इस साल प्रशांत महासागर शक्तिशाली 'ला नीना' के प्रभाव में है.

कहा जा रहा है कि इसी के असर से ऑस्ट्रेलिया में मूसलाधार बारिश हुई और चीन के ठंडे इलाक़ों में जमकर बर्फ़बारी हुई थी.

वैज्ञानिक जराउद का कहना है कि इसका असर गर्मियों में भी बरकरार रहेगा और वैश्विक तापमान में एक डिग्री के एकांश तक कमी आ सकती है.

तो क्या इसका मतलब यह है कि 1998 के बाद से पृथ्वी का तामपान बढ़ा ही न हो और यह सिर्फ़ 'अल नीनो' का असर हो.

कुछ वैज्ञानिकों ने सवाल उठाए हैं कि क्या ग्लोबल वार्मिंग अपने शीर्ष पर पहुँच चुका है और पृथ्वी ने ग्रीनहाउस गैसों के प्रति उम्मीद से ज़्यादा लचीलापन दिखाया है?

जराउद कहते हैं कि मामला यह नहीं है. वे कहते हैं कि 1998 का तापमान अभी भी सदी का सबसे अधिक तापमान वाला वर्ष हो सकता है.

लेकिन दूसरे वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले पाँच सालों के भीतर तापमान एक बार रिकॉर्ड स्तर तक और बढ़ेगा...हो सकता है कि इसे 'अल नीनो' के अगले दौर से जोड़कर देखा जाए.

उल्लेखनीय है कि 1997-98 में जब अल-नीनो आया था तब अफ़्रीका और एशिया में फसलों को भारी नुक़सान हुआ था और अमरीका के पश्चिमी तट पर बाढ़ आई थी.