मंगलवार, 26 फ़रवरी, 2008 को 14:35 GMT तक के समाचार
पल्लब घोष
बीबीसी विज्ञान संवाददाता
आयरलैंड के शोधकर्ताओं को कोकीन का नशा करने वाले लोगों की इच्छाशक्ति के बारे में कुछ नए तथ्य मिले हैं.
ये पता लगाने के लिए कि किसी व्यक्ति को कोकीन की लत क्यों लग जाती है, विशेषज्ञों ने कोकीन का सेवन करने वाले कुछ लोगों के मस्तिष्क की स्कैनिंग की.
इस जाँच से ये पता चला कि कोकीन मस्तिष्क के उन हिस्सों को बदल देता है, जो कि बात-व्यवहार और फ़ैसले लेने की प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं.
यानी कोकीन उस क्षमता में गड़बड़ी पैदा करता है जिसे हम इच्छा-शक्ति के नाम से जानते हैं.
ये गड़बड़ी किसी में कम, तो किसी में ज़्यादा हो सकती है क्योंकि विशेषज्ञों को कोकीन का सेवन करने वाले लोगों के मस्तिष्क की बनावट भी अलग-अलग दिखी.
नशा
हालाँकि अभी ये स्पष्ट नहीं है कि अध्ययन में शामिल इन लोगों के मस्तिष्क की बनावट पहले से ही अलग-अलग प्रकार की थी या कोकीन की लत लगने के बाद उनमें परिवर्तन आया.
हालाँकि विशेषज्ञ इस बात से इनकार नहीं कर रहे कि संभव है एक ख़ास तरह के मस्तिष्क वाले लोगों को कोकीन सेवन की लत लगने की ज़्यादा संभावना हो.
इससे ये भी साबित होता है कि कोकीन का असर सबके मस्तिष्क पर एक जैसा नहीं होता. और शायद इसीलिए किसी को कोकीन की लत लग जाती है, जबकि कुछ लोग कभी-कभार कोकीन के सेवन के बाद भी इसकी गिरफ़्त में नहीं फंसते.
डब्लिन के ट्रिनिट कॉलेज में ये अध्ययन करने वाले दल के प्रमुख डॉक्टर ह्यू गैरावाँ के अनुसार ताज़ा अध्ययन से ये स्पष्ट हो गया है कि मादक द्रव्यों की लत के लिए व्यक्ति विशेष की नैतिक कमज़ोरी को ही दोष नहीं दिया जा सकता, बल्कि इसके जैविक कारण भी ढूंढे जाने चाहिए.