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शुक्रवार, 15 फ़रवरी, 2008 को 12:44 GMT तक के समाचार

कोसों दूर है एचआईवी टीके की खोज

बीस साल के शोध के बावजूद वैज्ञानिक एचआईवी के टीके की खोज के आसपास भी नहीं हैं. ये चिंता ज़ाहिर की है नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक डेविड बाल्टीमोर ने.

अमेरिकन एसोसिएशन फ़ॉर द एडवांस्मेंट ऑफ़ साइंस यानी एएएएस के प्रोफ़ेसर डेविड बाल्टीमोर मानते हैं कि ये बहुत मुश्किल लड़ाई है. वहीं कुछ तो यहाँ तक कहते हैं कि टीके कभी खोजे ही नहीं जा सकते.

इसके बावजूद वैज्ञानिकों की ओर से कोशिश जारी है. डेविड बाल्टीमोर ने कहा, "वैज्ञानिकों के सामने बहुत बड़ी चुनौती है एचआईवी की प्रतिरोधकता को रोकना. इसके लिए प्रकृति को भी मात देनी होगी.”

प्रोफ़ेसर बाल्टीमोर अमरीका के बोस्टन शहर में चल रही एएएएस के सालाना बैठक को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि एचआईवी ने मानव के प्रतिरक्षक तंत्र से अपने आप को बचाने का रास्ता ढूँढ़ निकाला है.

उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि एचआईवी को हमारी प्रतिरोधक तंत्र को मूर्ख बनाने का रास्ता मिल गया है."

शरीर को इस वायरस से बचाने के लिए एंटीबॉडीज़ का प्रयोग करके प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जाती है लेकिन ये प्रयोग भी ज़्यादा सफल नहीं रहे हैं.

बाल्टीमोर ने इस पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इसके बाद तो वैज्ञानिकों की रही-सही उम्मीद भी कम होती जा रही है.

एक प्रयास

वैज्ञानिक अब कुछ अलग तरीक़ो जैसे जीन या मूल कोशिका (स्टेम सेल) पद्धति वाली चिकित्सा पर भी विचार कर रहे हैं लेकिन ये सब अभी शुरुआती स्तर पर है.

एचआईवी वायरस से जुड़े मामलों के जानकार प्रोफ़ेसर बाल्टीमोर ने कहा कि मनुष्यों में स्टेम सेल का जीन बदलना ही इस समस्या का एक मात्र उपाय नज़र आ रहा है.

हम एक ऐसा जीन बनाने में लगे हैं जिससे व्यक्तियों को उपचार का सही लाभ पहुँचाया जा सके.

प्रोफ़ेसर बाल्टीमोर को 1975 में औषधि के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार दिया गया था.

फ़िलहाल बाल्टीमोर, बिल गेट्स और मेलिंडा गेट्स फ़ाउंडेशन के सहयोग से कैलिफ़ोर्निया के कैल्टेक में चल रही एक प्रयोगशाला का संचालन कर रहे हैं.

इस प्रयोगशाला में एचआईवी की रोकथाम के लिए टीका बनाने पर शोध चल रहा है.