शनिवार, 09 फ़रवरी, 2008 को 09:31 GMT तक के समाचार
पसंदीदा वेबसाइट और दूसरी वेब सेवाओं के उपयोग के लिए कई आईडी और पासवर्ड याद रखने से जल्दी ही छुटकारा मिल सकता है.
तकनीकी क्षेत्र की बड़ी कंपनियाँ माइक्रोसॉफ़्ट, आईबीएम, गूगल और याहू वेब पर लॉग ईन की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए "ओपन आईडी फ़ाउंडेशन" के निदेशक मंडल में शामिल हो गए हैं.
फ़ाउंडेशन एक ऐसी प्रक्रिया और व्यवस्था शुरू करवाने की कोशिशों में जुटी है जिसमें सभी वेबसाइटों के लिए एक ही आईडी किसी भी उपभोक्ता की पहचान की गारंटी हो.
अब तक दस हज़ार से ज़्यादा वेबसाइटें एक ही आईडी पर उपभोक्ताओं को अपनी सेवाएँ मुहैया कराने की प्रक्रिया अपना चुकी हैं.
अभी वेब पर किसी नई सेवा का उपयोग करने का सीधा सा मतलब है कि आप उस साइट पर अपना नया खाता खोलें.
उपभोक्ता के लिए ढेर सारी निजी जानकारी भरना और एक नया आईडी-पासवर्ड पसंद करना सचमुच मुश्किल का सबब होता है.
ओपन आईडी का मक़सद है कि लोग जब एक साइट पर अपना खाता खोल लें तो अगली साइट की सेवा लेने के लिए उन्हें नया आईडी न चुनना पड़े.
उपभोक्ताओं की मुश्किल
योजना है कि पहले से एक आईडी रखने वाला जब किसी दूसरी साइट पर लॉग-ईन करे तो पहचान की पुष्टि के लिए इसकी जानकारी उस साइट को ख़ुद हो जाए जहाँ पहला आईडी बनाया गया था.
इससे लोगों को ऑनलाइन सेवाओं के लिए अपने आईडी की संख्या घटाने में मदद मिलेगी.
हाँ, लोग अलग-अलग तरह के काम के लिए अलग आईडी चुन सकते हैं.
गूगल के सॉफ़्टवेयर इंजीनियर ब्रैड फिज़पैट्रिक कहते हैं, "ओपन आईडी का उद्देश्य है साईन ऑन की विकेंद्रीकृत प्रक्रिया."
ब्रैड कहते हैं, "इस तरह की कोशिशों में जुटे एक फ़ाउंडेशन से जुड़ना बहुत अच्छी बात है."
माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, याहू, आईबीएम जैसी बड़ी कंपनियों के इसमें शामिल हो जाने से इस काम को गति मिल रही है क्योंकि इनकी सेवाओं के उपभोक्ताओं की संख्या अरबों में हैं.
इस बात की कोई जानकारी अभी नहीं दी गई है कि ओपन आईडी की व्यवस्था कब से शुरू होगी.
फ़ाउंडेशन में शामिल होने से पहले भी याहू और गूगल ने कुछ इसी तरह की सुविधा अपने उपभोक्ताओं को मुहैया कराई है.
जैसे ब्लॉगस्पॉट पर कोई भी गूगल वाली ओपन आईडी का इस्तेमाल कर टिप्पणी कर सकता है.