शुक्रवार, 01 फ़रवरी, 2008 को 17:28 GMT तक के समाचार
ब्रिटिश मेडिकल जर्नल के मुताबिक़ अधिक मीठे पेय पदार्थों का सेवन करने से गठिया होने का ख़तरा बढ़ जाता है.
एक शोध के मुताबिक़ जो लोग रोज़ाना दो या दो से अधिक मीठे पेय पदार्थ पीते हैं उनमें गठिया होने की आशंका उन लोगों के मुक़ाबले 85 प्रतिशत तक अधिक होती है जो पीठे पेय पदार्थ नहीं पीते.
ये शोध हार्वर्ड और कनाडा की वैंकूवर यूनिवर्सिटी ने मिलकर किया है.
हाल के दशको में अमरीका में गठिया के मामलों में दोगुना वृद्धि हुई है और शोध करने वाले वैज्ञानिकों का मानना है कि इसकी वजह शर्करा में पाया जाने वाला रासयनिक तत्व फ्रुक्टोज़ है.
ब्रिटेन के विशेषज्ञों का कहना है कि जो लोग गठिया की बीमारी से ग्रस्त हैं उन्हे अपने मीठे पेय पदार्थों में कटोती करने की सलाह दी जाती है.
ब्रिटेन में आबादी का 1.5 फ़ीसदी हिस्सा इस बीमारी से जूझ रहा है और हाल के तीस वर्षों में इसमें भारी इज़ाफ़ा हुआ है.
इस बीमारी के लक्षण शरीर के निचले हिस्सों में दर्द, जोड़ों में सूजन और दर्द हैं. इसकी मुख्य वजह यूरिक अम्ल के कणों का रक्त से निकलकर जोड़ों पर जमा हो जाना है.
अमरीकी और कैनेडियन शोध में भी सॉफ़्ट ड्रिंक को ही इस बीमारी के बढ़ने की वजह माना गया है.
पिछले शोधों भी यही बताते हैं कि फ्रुक्टोज़ या फल शर्करा रक्त में यूरिक अम्ल का स्तर बढ़ाता है.
शोध
इस पूरे शोध के लिए एक टीम ने 12 सालों के अध्य्यन को आधार माना है जिसमें 4600 आदमी शामिल किए गए. सभी की उम्र 40 साल थी और किसी को भी पहले से गठिया की बीमारी नहीं थी.
इनसे नियमित खान-पान के बारे में सवाल पूछे गए. इस दौरान, गठिया के 755 नए मामले सामने आए. बीमारी का ख़तरा हफ़्ते में 5 से 6 सॉफ़्ट ड्रिंक पीने से काफ़ी बढ़ जाता है.
इसके अलावा शरीर का भार, उम्र, बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर और शराब का सेवन भी गठिया के प्रमुख कारक हैं.