शुक्रवार, 18 जनवरी, 2008 को 01:56 GMT तक के समाचार
ब्रितानी वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने उन स्टेम सेल्स की तलाश कर ली है जिनके कारण बच्चे आमतौर पर होने वाले रक्त कैंसर का शिकार होते हैं.
शोधकर्ताओं का कहना है कि इस खोज से रक्त कैंसर यानी ल्यूकेमिया का इलाज अपेक्षाकृत आसानी से हो सकेगा.
उनका कहना है कि इस खोज से दूसरे तरह के कैंसरों का भी इलाज ढूँढ़ा जा सकेगा.
इस शोध में तीन साल की एक ब्रितानी बच्ची की भूमिका अहम रही है.
ओलिविया नाम की इस बच्ची को एक साल पहले ल्यूकेमिया होने का पता चला था. इलाज शुरु करने के दौरान डॉक्टरों को पता चला की उसकी जुड़वा बहन इलाबेला को यह बीमारी नहीं थी.
इसके बाद डॉक्टरों ने दोनों की रक्त कोशिकाओं की तुलना करनी शुरु की और उन्होंने उस अहम स्टेम सेल्स की तलाश कर ली जिसके कारण रक्त कैंसर हुआ था.
अब वैज्ञानिक मानने लगे हैं कि जब शरीर की सारी कोशिकाएँ स्टेम सेल्स से पैदा होती हैं तो कैंसर के ट्यूमर भी स्टेम सेल्स से ही पैदा होते होंगे.
पीड़ादायक इलाज
आमतौर पर कैंसर का इलाज करने के लिए ट्यूमर को नष्ट करने पर ध्यान दिया जाता है. या तो उसका ऑपरेशन करके हटा दिया जाता है या फिर कीमोथेरेपी या रेडिएशन से उसे नष्ट करने का प्रयास किया जाता है.
इन प्रक्रियाओं में यदि एक भी कोशिका छूट गई तो कैंसर दोबारा पैदा हो जाता है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि कैसर के लिए ज़िम्मेदार स्टेम सेल्स की तलाश के बाद कैंसर का इलाज कम पीड़ादायक हो जाएगा और शरीर को कम नुक़सान पहुँचाने वाला भी.
उदाहरण के तौर पर ब्रितानी बच्ची ओलिविया की एक आँख इलाज के दौरान ख़राब हो गई है.
वैज्ञानिक मानते हैं कि कोई एक प्रतिशत बच्चे कोशिकाओं में ख़राबी के साथ पैदा होते हैं लेकिन अभी वे यह नहीं जानते कि कुछ बच्चों को ल्यूकेमिया होता है और कुछ को नहीं, ऐसा क्यों है?