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उरुग्वे ने ख़रीदे सौ डॉलर वाले लैपटॉप

उरुग्वे की सरकार की तरफ से सौ डॉलर वाले लैपटॉप के लिए पहला आधिकारिक ऑर्डर जारी किया गया है.

दक्षिण अमरीकी देश उरुग्वे छह से 12 साल की उम्र के स्कूली बच्चों के लिए एक लाख लैपटॉप ख़रीद रहा है.

इसके बाद देश के हर बच्चे को यह मशीन देने के लिए उरुग्वे ऐसी तीन लाख मशीनें और ख़रीद सकता है.

एक्सओ मशीन नाम के जाने जाने वाले इस सस्ते लैपटॉप को ख़ासतौर से विकासशील देशों के बच्चों के इस्तेमाल के लिए बनाया गया है.

ठोस ऑर्डर जुटाने में परेशानियाँ झेल रही 'हर बच्चे के लिए एक लैपटॉप' (ओएलपीसी) परियोजना से जुड़ी संस्था के लिए यह आर्डर काफी उत्साहजनक साबित होगा.

संस्था के संस्थापक निकोलस नेग्रोपोंटे ने पिछले दिनों न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि देश के प्रमुखों के साथ हाथ मिलाने और चैक लेने के बीच जो अंतर है उनकी समझ में यह अंतर अब कुछ कम हुआ है.

उन्होंने कहा, "फिर भी, इस पहले सौदे से मैंने खुशी महसूस की."

वे कहते हैं, "हम उरुग्वे की अपने बच्चों और अध्यापकों को लैपटॉप देने के लिए ठोस कार्रवाई करने वाला पहला देश बनने के लिए सराहना करते हैं. हमें उम्मीद है कि दूसरे देश भी इस उदाहरण को अपनाएँगे."

यह ज़्यादा समय तक चलने वाला और जलरोधी है. यह पैरों के पम्प, डोरी खींचने या सूर्य की रोशनी से भी चार्ज हो सकता है.

ओएलपीसी का लक्ष्य इस लैपटॉप को सौ डॉलर या इससे भी कम पर बेचना है. फिर भी पिछले साल से इस मशीन का दाम धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है. अब यह 188 डॉलर का हो गया है.

वितरण

सरकारों को पहले सफ़ेद और हरे रंग की यह मशीनें सिर्फ ढाई लाख की संख्या में ही बेचने का प्रस्ताव दिया गया था लेकिन अब इसमें बदलाव आया है. अब इनकी बिक्री और इसका वितरण अनेक प्रकार से किया जा रहा है.

उदाहरण के लिए 12 नवम्बर के बाद से विकासशील देश की जनता का कोई भी सदस्य अपने या अपने बच्चे के लिए एक मशीन भी ख़रीद सकता है.

कंबोडिया, अफ़ग़ानिस्तान, रवांडा और हैती में तो लैपटॉप के वितरण के लिए शुरूआत में ‘एक दो और साथ में एक मुफ़्त पाओ’ कार्यक्रम भी चलाया जाएगा.

पता लगा है कि दूसरी योजनाओं में लीबिया की सरकार से हर बच्चे को एक लैपटॉप देने का सौदा हुआ है और पेरू के साथ भी एक सौदा हुआ है. इथोपिया को 50 हज़ार मशीन देने के लिए इटली एक कार्यक्रम प्रायोजित कर रहा है.

शुरूआत में एक्सओ लैपटॉप देश के 19 क्षेत्रों में 8-9 जगहों पर बाँटे जाएंगे. बाद में तीन लाख मशीनों के आने पर देश के हर बच्चे को एक लैपटॉप मिल जाएगा.

संस्था के अध्यक्ष मिगेल ब्रेचनर कहते हैं कि देश की बाकी ज़रूरत को हम 2008 के अंत में पूरा करेंगे.