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मंगलवार, 30 अक्तूबर, 2007 को 14:08 GMT तक के समाचार

पॉल रिंकॉन
बीबीसी के विज्ञान संवाददाता, स्पेन

लाल बालों वाले थे निएंडरथल

यूरोप और मध्य पूर्व के भू-भाग में रहने वाले निएंडरथल प्रजाति के कुछ लोग संभवत: लाल बालों वाले थे. डीएनए के एक अध्ययन में यह बात सामने आई है.

इनके चार लाख वर्ष पुराने जीवाश्म मिलते हैं. अपने विकास के चरम पर नाटे कद के ये ताकतवर शिकारी बहुत बड़े इलाके में पाए गए. पश्चिम में ब्रिटेन और आईबेरिया, दक्षिण में इसराइल और पूर्व में साईबेरिया तक इनके निशान मिले हैं.

साइंस पत्रिका में छपे एक अध्ययन के मुताबिक शोधकर्ताओं ने निएंडरथल प्रजाति के दो अवशेषों से डीएनए के नमूने लिए और उससे एक ख़ास जीन एमसी-I-आर के अंश को निकाला.

इन जीन में म्यूटेशन यानि बदलाव की वजह से ही आज लोगों के बाल लाल होते हैं. आज तक यह बात अनसुलझी थी कि मनष्य के विलुप्त 'संबंधियों' के बाल किस रंग के थे.

निएंडरथल के जीन के एक नमूने का विश्लेषण करने पर वैज्ञानिकों ने पाया कि उनकी लटें भी गहरे लाल रंग की होती थी.

बार्सिलोना यूनिवर्सिटी में जेनेटिक्स यानि आनुवांशिकी के सहायक प्रोफ़ेसर और शोध के प्रमुख लेखक कार्ल्स लैलुएजा-फ़ॉक्स ने कहा, "हमने निएंडरथल प्रजाति के लोगों में एमसी-I-आर का एक रूप पाया जो आधुनिक मानव में मौज़ूद नहीं है. लेकिन बालों के रंग पर इसका असर वैसा ही है, जैसा आज के लाल बाल वाले लोगों में दिखता है."

हालांकि निएंडरथल को कभी हमारा पूर्वज माना जाता था लेकिन आज अधिकांश लोग उन्हें मानव की विकास यात्रा की एक कड़ी मानने से भी इंकार करते हैं.

मानवों की प्रजाति होमोसेपिएंस का विकास अफ़्रीका में हुआ जिन्होंने यूरोप में 40 हज़ार साल पहले प्रवेश के बाद निएंडरथल्स को विस्थापित किया. निएंडरथल्स के बारे में अंतिम ज्ञात जानकारी भी 28 से 24 हज़ार साल पुरानी है.

अध्ययन के रास्ते खुले

निएंडरथल्स कैसे थे, यह जानने के लिए पिछले दिनों तक वैज्ञानिक सिर्फ़ जीवाश्मों का ही अध्ययन कर सके थे. लेकिन हालिया पथप्रदर्शक शोधों ने उनकी हड्डियों से डीएनए के नमूने लेकर अध्ययन करने के रास्ते खोल दिए हैं.

आनुवांशिकी इनकी जैविक संरचना के उन पहलुओं को सामने ला सकती है जिन पर जीवाश्मों के अध्ययन से प्रकाश नहीं पड़ सका. इनमें बाल, त्वचा, आंखों के रंग, कोशिका की रासायनिक संरचना और किसी चीज़ के बोध की क्षमता शामिल है.

इनकी मदद से वैज्ञानिक यह बता पाने में सफल होंगे कि धरती पर हमारा वंश कैसे चला और उनका मिट गया. वैज्ञानिकों के लिए त्वचा और बालों के रंग इस दिशा में प्रारंभिक लक्ष्य हैं.

खास़ जीन

शोधकर्ताओं ने निएंडरथल में एक ऐसा ख़ास जीन पाया जो आधुनिक मानव में नहीं है. इस जीन का बाल या त्वचा पर असर जांचने के लिए वैज्ञानिकों ने इस जीन को मानव शरीर के रंगों को नियंत्रित करने वाले मेलानोकाइट कोशिकाओं में डाला.

मेलानोकाइट वे कोशिकाएँ हैं जो काले रंग का मेलानिन पैदा करती हैं. मेलानिन मानव की त्वचा, बाल और आंखों का रंग तय करता है.

डॉक्टर फॉक्स ने बीबीसी को बताया, "संभवतः निएंडरथल प्रजाति के लोगों में बाल के वे सारे रंग मौजूद थे जो आज यूरोपीय आबादी में दिखते हैं, चाहे वह रंग काला हो, लाल हो या भूरा."