मंगलवार, 30 अक्तूबर, 2007 को 16:26 GMT तक के समाचार
खान-पान में पसंद-नापसंद महज़ आपके पालन-पोषण पर ही निर्भर नहीं करता बल्कि इसके पीछे और भी बहुत सी वजहें हो सकती हैं, ब्रिटेन के शोधकर्ताओं का मानना है कि व्यक्ति के जीन की भी इसमें बड़ी भूमिका हो सकती है.
लंदन के किंग्स कॉलेज के विशेषज्ञों ने इसी पहेली को सुलझाने की कोशिशों के तहत हज़ारों जुड़वाँ लोगों के खान-पान की आदतों की तुलना की है.
विशेषज्ञों का कहना है कि एक-जैसे दिखने वाले जुड़वाँ लोगों में अन्य लोगों से यह संभावना कहीं ज़्यादा रहती है कि उनके खान-पान की आदतें, रूचि एक सी हों - मसलन कॉफ़ी पीने या लहसुन खाने में उनकी रुचि एक सी हो सकती है.
इससे ऐसा संकेत मिलता है कि संभवत: खान-पान में रुचि माता-पिता से मिलती हो.
स्वास्थ्य सेवा से जुड़े एक मनोवैज्ञानिक का कहना था कि इसका मतलब ये हुआ कि बचपन में खान-पान में बिगड़ी आदतों को सुधारना आसान नहीं होगा, जैसा कि पहले समझा जाता रहा है.'
जीन की भूमिका
समान दिखने वाले जुड़वाँ लोगों की आनुवंशिक रूपरेखा भी बिलकुल समान होती है. वैज्ञानिक अब जुड़वाँ लोगों की तुलना ऐसे लोगों से करके, जो जुड़वाँ नहीं हैं, यह पता लगा सकते हैं कि किस हद तक उनकी व्यक्तिगत विशिष्ठता उनके 'स्वभाव' या जीन से निर्धारित होती है या फिर 'पालन-पोषण' से.
किंग्स कॉलेज के शोधकर्ताओं ने 18 से 79 वर्ष के बीच की उम्र की तीन हज़ार से ज़्यादा जुड़वाँ महिलाओं का अध्ययन किया है.
वैज्ञानिकों ने पाँच भिन्न वर्गों में आहार संबंधी उनकी रुचियों को बाँटकर लोगों की रुचियों को परखा. इनमें ऐसे आहार थे जिनमें फल, सब्ज़ी, शराब, भुना हुआ गोश्त और आलू की मात्रा ज़्यादा थी और ऐसे आहार भी जो कम वसा से युक्त होते हैं या जिनमें मांस, मछली और अंडे की मात्रा कम होती है.
'ट्विन रिसर्च एंड ह्यूमन जेनेटिक्स' नामक पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन के परिणामों से यह पता चलता है कि किसी व्यक्ति का 41 से 48 फ़ीसदी के बीच झुकाव आहार सबंधी इन वर्गों में से एक में उनके जीन से प्रभावित था.
शोध निदेशक प्रोफ़ेसर टिम स्पेक्टर का कहना था, "पिछले लंबे समय से हमने मान लिया था कि हमारी परवरिश और सामाजिक वातावरण ही खान-पान में हमारी रुचि को निर्धारित करते हैं लेकिन ज़्यादातर मामलों में हमारी आनुवांशिक रूपरेखा ही हमारे आहार संबंधी व्यवहार को प्रभावित करती है."