शनिवार, 06 अक्तूबर, 2007 को 10:16 GMT तक के समाचार
दक्षिण भारत में दूरदराज के गाँवों के लोग भी आधुनिकतम नेत्र चिकित्सा का लाभ उठा रहे हैं और यह संभव हुआ है वाइ-फ़ाइ यानी वायरलेस फिडेलिटी तकनीकी के ज़रिए.
मसलन, तमिलनाडु के थेनी स्थित अरविंद नेत्र अस्पताल में विशेषज्ञ उच्च गुणवत्ता वाले वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए इससे जुड़े दूरदराज के नौ क्लीनिकों में मरीजों की आँखों की जाँच कर सकते हैं.
इस नई तकनीक का विकास अनुसंधानकर्ताओं ने भारतीय अस्पतालों के सहयोग से अमरीका में बर्कले स्थित यूनीवर्सिटी ऑफ़ कैलीफ़ोर्निया और इंटेल कॉरपोरेशन में किया.
प्राथमिकता
वैज्ञानिकों की प्राथमिकता ऐसी सस्ती और मज़बूत वायरलेस नेटवर्क तकनीकी का विकास करना था, जो विकासशील क्षेत्रों की ज़रूरतों को पूरा कर सके.
हालाँकि वैज्ञानिकों के पास लंबी दूरी के वायरलेस नेटवर्क के लिए वाइमैक्स तकनीकी को इस्तेमाल करने का विकल्प था, लेकिन इसका क्रियान्वयन काफ़ी मँहगा था.
प्रोफ़ेसर ब्रेवर ने कहा, "इस तकनीक की ख़ासियत है कि अच्छी गुणवत्ता से एंटीना लगाकर आप रेडियो सिग्नल हासिल कर सकते हैं."
वैज्ञानिकों के दल ने ऐसी वायरलैस सिस्टम तैयार किया जो अस्पतालों को विज़न सेंटर से जोड़ता है.
इस परियोजना से जुड़े सोनेश सुरैना कहते हैं, "गैर सरकारी संगठन यानी एनजीओ वाइमैक्स जैसी तकनीक का ख़र्च वहन नहीं कर सकते."
वाइ-फाइ सिस्टम से दूरदराज के गाँवों में रहने वाले लोगों की उच्च गुणवत्ता की वीडियो तस्वीरें मिल सकती हैं.
अनुसंधानकर्ताओं ने ऐसा सॉफ़्टवेयर भी तैयार किया है जो वाइ-फ़ाइ कनेक्शन के ज़रिए भेजी जा रही ग़ैरज़रूरी जानकारियों को ख़ुद-ब-ख़ुद हटा देगा.
अरविंद नेत्र चिकित्सालय के चेयरमैन डॉ नेमपेरुमलयसामी कहते हैं, "पुराने सिस्टम में हमें ऑडियो और थोड़ा बहुत वीडियो मिल पाता था, लेकिन अब वाइ-फ़ाइ सिस्टम से उच्च गुणवत्ता का वीडियो और ईमेल चंद सेकंडों में ही सैकड़ों किलोमीटर का फ़ासला तय कर देता है."