शनिवार, 22 सितंबर, 2007 को 04:45 GMT तक के समाचार
दवाएँ बनाने वाली अंतरराष्ट्रीय कंपनी मर्क ने एचआईवी से निपटने के लिए टीका बनाने के प्रयोग बंद कर दिए हैं.
अब तक एड्स के ख़िलाफ़ की जा रही कोशिशों में एचआईवी से निपटने के लिए बनाया जा रहे टीके पर ख़ासी उम्मीदें टिकी हुई थीं.
दस साल से इस टीके को बनाने में जुटी मर्क कंपनी ने एचआईवी टीके के 'ट्रायल' इसलिए रोक दिए हैं क्योंकि ये पाया गया है कि ये एचआईवी संक्रमण रोकने में कारगर नहीं हैं.
मर्क के 'ट्रायल' के दौरान जो लोग इस प्रयोग में हिस्सा ले रहे थे उनपर इस टीके का इस्तेमाल उन्हें एचआईवी संक्रमण एचआईवी संक्रमण से बचा नहीं पाया.
'स्टेप' नाम से जाने जाते ये 'ट्रायल' वर्ष 2004 में उन 3000 लोगों के सहयोग से शुरु हुए थे जो एचआईवी वायरस से संक्रमित नहीं थे और 18 से 25 साल की उम्र के थे.
मर्क के अनुसार अपनी इच्छा से इस प्रयोग में भाग लेने वाले लोगों में से जब 741 को टीका लगाया गया तब उनमें से 24 एचआईवी वायरस से संक्रमित हो गए.
स्वतंत्र निरीक्षकों ने टीके के प्रयोग को बंद करने की सिफ़ारिश की और कहा कि ये प्रयोग सफल नहीं होंगे.
एचआईवी वेक्सीन ट्रायल नेटवर्क की सारा एलेक्सांडर का कहना था, "इस उद्योग के लिए ये बहुत ही दुखद दिन है क्योंकि मर्क के टीके ने ऐसी क़ाबिलियत दिखाई थी जिससे शरीर का इम्यून सिस्टम यानि प्रतिरक्षी तंत्र
सक्रिय हो जाता है. इससे कई लोगों को उम्मीद की किरण दिखाई दी थी."