गुरुवार, 30 अगस्त, 2007 को 06:18 GMT तक के समाचार
इंटरनेट नेटवर्क के संस्थापकों में से एक और गूगल के विंट सर्फ़ ने इंटरनेट पर प्रकाशित की जाने वाली सामग्री पर सख़्त निगरानी की अपील ठुकरा दी है.
हालांकि उन्होंने कहा है कि सामाजिक बुराइयों के लिए इंटरनेट को बलि का बकरा नहीं बनाया जाना चाहिए.
बीबीसी रेडियो-फ़ोर के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि इंटरनेट तो उस समाज का एक प्रतिबिंब है जिसमें हम रहते हैं.
विंट सेफ़ ने कहा कि जो सामग्री सचमुच ग़ैरक़ानूनी नहीं है उसे यदि नियंत्रित करने की कोशिश की जाती है तो इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर असर पड़ेगा.
उन्होंने कहा, "यदि कोई सामग्री ग़ैरक़ानूनी नहीं है तो यह सवाल दिलचस्प होगा कि आप यह तय कैसे करेंगे कि सामग्री पर नियंत्रण की ज़रुरत है."
विंट सर्फ़ की यह टिप्पणी ब्रिटेन के कंज़रवेटिव पार्टी के इस सुझाव के बाद आया है कि युवा लोगों के इंटरनेट के उपयोग को नियंत्रित करने की ज़रुरत है क्योंकि वे यू-ट्यूब जैसी साइट पर जाकर बहुत हिंसक वीडियो देख रहे हैं.
सेफ़ का सुझाव था कि एकमुश्त प्रतिबंध से अच्छा होगा कि इंटरनेट का उपयोग करते समय एहतियाती क़दम उठाए जाएँ.
उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब गूगल पर लोग सर्च कर रहे हों तो वहाँ फ़िल्टर को और पुख़्ता किया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, "वास्तविक दुनिया और इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री को अलग-अलग मान लेना ग़लती होगी."
सर्फ़ का कहना था, "इंटरनेट पर जो भी सामग्री उपलब्ध है उसमें से ज़्यादातर लोगों के ज़रिए ही आती है."
इंटरनेट को समाज का आइना बताते हुए विंट सर्फ़ ने कहा, "जब आप आइना देखते हैं और कोई गड़बड़ी दिखती है तो आप आइना नहीं बदलते बल्कि उसका निवारण करते हैं जिसके कारण प्रतिबिंब में गड़बड़ी दिख रही हो."
उनका कहना था कि यदि कोई गड़बड़ी दिखाई देती है तो समाज की तरह हमारा सामूहिक दायित्व है कि हम उससे मिलकर निपटें, लेकिन ज्ञान का जो भंडार उसमें उपलब्ध है, उसे रोकने से कोई रास्ता नहीं निकलेगा.
विंट सेफ़ ने कहा, "हमें समस्या से सीधे निपटना होगा."