मंगलवार, 07 अगस्त, 2007 को 10:40 GMT तक के समाचार
जीवन के 55 साल सिर में फंसी पेंसिल के साथ गुज़ारने के बाद जर्मनी की इस महिला को आख़िरकार इससे होने वाले कष्टों से मुक्ति मिल ही गई.
मार्ग्रेस वेगनर तब चार साल की थी, जब वह एक हादसे के दौरान गिर गई थी और पेंसिल उनके गाल में घुस गई थी.
इस पेंसिल का कुछ हिस्सा दाहिनी आँख के कुछ ऊपर मस्तिष्क तक धंस गया था.
59 वर्षीय वेगनर को इसके कारण अक्सर सिरदर्द और नाक से खून बहने की शिकायत रहती थी.
मुश्किल ऑपरेशन
बर्लिन में सर्जनों ने लगभग दो घंटे के ऑपरेशन के बाद पेंसिल को मस्तिष्क से हटा दिया.
लेकिन अब भी क़रीब दो सेंटीमीटर लंबा पेंसिल का टुकड़ा वेगनर के मस्तिष्क में फंसा हुआ है और डॉक्टरों का कहना है कि इसे हटाना नामुमकिन है.
इस मुश्किल ऑपरेशन को अंजाम देने वाले इंडोस्कोपिक सांइस सर्जरी के विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर हेंस बेरबोहम ने कहा कि वेगनर अब चल-फिर सकती हैं और उन्हें किसी तरह का दर्द नहीं हो रहा है.
बेरबोहम ने बीबीसी से कहा, "पेंसिल के बीच का हिस्सा कोमल तंतुओं से ढका है और इससे मरीज़ को किसी तरह का ख़तरा नहीं है."
उन्होंने कहा, "ऑपरेशन के लिहाज़ से ये हिस्सा बेहद संवेदनशील है. आधुनिक मेडिकल तकनीक से इसे हटाने में भी कुछ जोखिम है."
उन्होंने कहा, "वेगनर को अब सिरदर्द की शिकायत नहीं है और वह अपने आसपास की गंध को सूंघ सकती हैं."
मस्तिष्क में फंसी इस पेंसिल की लंबाई कोई आठ सेंटीमीटर थी और आँख का संवेदनशील हिस्सा इससे होने वाले नुक़सान से बाल-बाल बचा था.
हादसे के वक़्त डॉक्टरों का कहना था कि अभी ऑपरेशन करना बेहद ख़तरनाक़ है, क्योंकि पेंसिल मस्तिष्क के काफ़ी क़रीब थी.