रविवार, 15 जुलाई, 2007 को 08:23 GMT तक के समाचार
शोध से पता चला है कि रोजाना दूध पीना न केवल सेहत के लिए अच्छा है, बल्कि इससे मधुमेह और दिल की बीमारियों का ख़तरा भी कम हो जाता है.
ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने 20 साल तक अध्ययन करने पर पाया है कि दूध का नियमित सेवन करने वाले पुरुषों में मधुमेह का जोखिम कम हो जाता है.
कार्डिफ़ यूनिवर्सिटी के इस शोध दल ने 45 से 59 वर्ष की आयु वर्ग के लोगों पर यह अध्ययन किया.
अध्ययन में मैटाबोलिक सिंड्रोम यानी उच्च रक्तचाप, मोटापा, इंसुलिन प्रतिरोध और दिल की बीमारियों से पीड़ित लोगों को शामिल किया गया.
मैटाबोलिक सिंड्रोम
20 वर्ष के अध्ययन में नियमित तौर पर उन पुरुषों के खानपान, दूध और दूध से निर्मित खाद्य पदार्थों का हिसाब-किताब रखा गया.
अध्ययन की शुरुआत में शामिल 15 फ़ीसदी लोग मैटाबोलिक सिंड्रोम के शिकार थे.
मैटाबोलिक सिंड्रोम से ग्रसित लोगों में दिल का दौरा पड़ने का जोखिम आम व्यक्ति के मुक़ाबले दोगुना और मधुमेह का ख़तरा चार गुना होता है.
शोध में पाया गया कि अगर वे प्रतिदिन लगभग दो गिलास दूध पीएँ तो उनमें मैटाबोलिक सिंड्रोम के आसार 62 फ़ीसदी कम होते हैं.
इसके अलावा अगर वे नियमित तौर पर दूध के उत्पाद खाते हैं तो उनमें सिंड्रोम की संभावना 56 फ़ीसदी कम हो जाती है.
लोग जितने ज़्यादा दुग्ध उत्पादों का उपभोग करते हैं, उनमें मैटाबोलिक सिंड्रोम का जोखिम उतना ही कम हो जाता है.
उल्लेखनीय है कि दुनिया भर में हो रही मौतों के लिए मधुमेह चौथा सबसे बड़ा कारण माना जाता है.
उधर, मधुमेह सलाहकार जेम्मा एडवर्ड्स का कहना है कि वे टाइप-टू मधुमेह से बचने के लिए उच्च वसायुक्त दुग्ध उत्पादों से परहेज की सलाह देंगी.
उनका कहना है कि लोगों को संतुलित आहार और शारीरिक गतिविधियों को अहमियत देनी चाहिए.