शनिवार, 23 जून, 2007 को 03:19 GMT तक के समाचार
वैज्ञानिकों का कहना है कि परिवार का पहला बच्चा ज़्यादा अक्लमंद होता है.
नॉर्वे के वैज्ञानिकों ने माता-पिता की पहली संतानों की तुलना अन्य बच्चों से की तो पाया कि पहले बच्चे का आइक्यू (बुद्धिमत्ता का स्तर) अधिक है.
विज्ञान पत्रिका साइंस में छपे इस शोध को बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है जिसमें ढाई लाख बच्चों के आइक्यू का जायज़ा लिया गया.
वैज्ञानिक लंबे समय से इस पहेली से उलझते रहे हैं कि बुद्धिमत्ता का कितना संबंध जन्म की स्थितियों से है.
नॉर्वे के वैज्ञानिकों का कहना है कि इसकी वजह ये है कि पहले बच्चे के ऊपर माँ-बाप जितना ध्यान दे पाते हैं उतना दूसरे बच्चों पर नहीं दे पाते.
वैज्ञानिकों का ये भी कहना है कि माता के गर्भ में आने वाले बदलावों का भी असर होता है, उनके मुताबिक़ हर बार गर्भधारण करने पर एंडीबॉडीज़ का स्तर पिछली बार की तुलना में अधिक होता है जिससे भ्रूण के मस्तिष्क पर असर पड़ता है.
ऐसे वैज्ञानिकों की कमी नहीं है जो इस शोध से असहमत हों, उनका कहना है कि पैदा होने के क्रम का असर बुद्धिमत्ता पर नहीं पड़ता.
इस शोध से असहमत वैज्ञानिकों की दलील है कि आँकड़ों से यह साबित हो गया है कि अधिक आइक्यू वाले लोगों के एक या दो बच्चे ही होते हैं, जबकि कम आइक्यू वाले लोगों की अधिक संतानें होती हैं.
अब सामान्य तौर पर अधिक आइक्यू वाले लोगों की संतान भी बुद्धिमान होगी और अधिक बच्चे पैदा करने वाले कम बुद्धिमान लोगों की संतानों की बुद्धि का स्तर कम हो सकता है यानी बुद्धिमत्ता का संबंध जीन से है लेकिन पैदाइश के क्रम से नहीं.
शोध का नेतृत्व करने वाले प्रोफ़ेसर पीटर क्रिस्टेनन का कहना है कि हालाँकि बच्चों के बुद्धिमत्ता के स्तर में मामूली अंतर था लेकिन वह उनके सिद्धांत को सही साबित करने के लिए काफ़ी था.
शोधकर्ताओं का भी मानना है कि यह सामाजिक मुद्दा अधिक है न कि वैज्ञानिक विषय. इसकी एक मिसाल देते हुए वैज्ञानिकों ने कहा कि जो लोग बड़े भाई या बहन का निधन हो जाने की वजह से परिवार की पहली संतान बन गए थे उनकी बुद्धिमत्ता का स्तर बड़े बच्चे जैसा ही था.
पीटर क्रिस्टेनन कहते हैं, "यह बच्चे के सामाजिक क्रम से जुड़ा मामला है न कि उसकी पैदाइश के क्रम से."