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गुरुवार, 21 जून, 2007 को 08:41 GMT तक के समाचार

दिल के दौरे से मोटे मरीज़ों को राहत

ज़्यादा वज़न वाले लोगों के लिए एक राहत की ख़बर है. एक अध्ययन में पता लगा है कि दिल के दौरे के इलाज़ के बाद मोटे लोगों और एंजिना के मरीज़ों की मौत होने की संभावना कम हो जाती है.

जर्मनी और स्विट्जरलैंड के शोधकर्ताओं ने 1676 मरीज़ों पर किए अध्ययन में पाया कि इलाज के तीन साल बाद तक मोटापे से जूझ रहे मरीज़ों की मौत की संख्या सामान्य वज़न वाले लोगों की मौत की संख्या से आधी थी.

हालाँकि 'यूरोपियन हर्ट जर्नल' में छपे इस शोध में मोटे मरीज़ों की मौत की संभावना घटने की वजह नहीं बताई गई.

विशेषज्ञों ने ये भी बताया कि मोटे लोगों में दिल की बीमारी होने की संभावना भी अधिक होती है.

अस्पताल में भर्ती अस्थिर एंजिना और दिल के दौरे की बीमारी से परेशान 1676 मरीज़ों पर ये अध्ययन किया गया.

शीर्ष शोधकर्ता डॉ हींज़ ब्यूटनर ने कहा, "इसमें शक़ नहीं कि मोटे लोगों को मधुमेह, हाइपरटेंशन और हृदय धमनी की बीमारी होने की संभावना अधिक होती है. हमारे अध्ययन से पता चला कि यदि एक बार हृदय धमनी का इलाज ठीक से हो जाए तो सामान्य वज़न वाले लोगों की तुलना में मोटे लोगों के स्वस्थ रहने की संभावना बढ़ जाती है."

वजहें

सामान्य वज़न वालों की तुलना में मोटे लोग अधिक युवा दिखते हैं और उन्हें दिल की बीमारियों की कुछ दवाएँ देकर अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है.

लेकिन डॉ ब्यूटनर ने कहा कि उनके इस शोध से निम्न मृत्यु दर की वजह का ठीक से पता नहीं चलता.

उनका कहना था कि मोटापे से शरीर में होने वाले परिवर्तन इसकी वजह हो सकते हैं.

मोटे लोगों में वसा की मात्रा अधिक होती है जो रक्षात्मक प्रभाव पैदा करते हैं.

साथ ही रक्त प्लेटलेट का स्तर भी मोटे मरीज़ों में अधिक होता है जो ख़ून का थक्का जमने में प्रभावकारी भूमिका निभाते हैं.

ब्रिटेन में हृदय रोगों से जुड़े विषयों पर अध्ययन करने वाली संस्था 'ब्रिटिश हर्ट फ़ाउंडेशन' के जून डेविसन का कहना है, "यह शोध जवाबों से अधिक सवाल खड़े करता है. इस क्षेत्र में अभी और अधिक शोध किए जाने की ज़रूरत है."