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रविवार, 17 जून, 2007 को 03:05 GMT तक के समाचार

प्लूटो को लगा एक और झटका

सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह कहे जाने वाले प्लूटो के बुरे दिन तभी शुरू हो गए थे जब उसे ग्रह की श्रेणी से हटा दिया गया था. उसकी इज्ज़त पर एक और बट्टा लग गया है.

प्लूटो को 'डवॉर्फ़ प्लैनेट' यानी छुद्र ग्रह की श्रेणी में डाल दिया गया था और कहा गया था कि वह सबसे बड़ा छुद्र ग्रह है लेकिन उसे एक ग्रह होने का सम्मान नहीं दिया जा सकता.

अब कहा जा रहा है कि वह सौरमंडल के छुद्र या बौने ग्रहों में सबसे बड़ा भी नहीं है.

एक अन्य छुद्र ग्रह एरिस की खोज के बाद ही प्लूटो का ग्रह का ख़िताब छिन गया था, अब वैज्ञानिकों का कहना है कि एरिस प्लूटो से आकार में बड़ा है.

अमरीकी खगोलवैज्ञानिकों की खोज को प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिका साइंस ने प्रकाशित किया है.

एरिस को पहली बार 2003 में देखा गया था लेकिन यूबी313 के नाम से जाने जाने वाले इस छुद्र ग्रह की पक्की पहचान 2005 में हुई थी, एरिस का सूर्य का एक चक्कर लगाने में 560 वर्ष लगते हैं.

अमरीका के हबल स्पेस टेलीस्कोप ने 2006 में बता दिया था कि एरिस का व्यास प्लूटो से बड़ा है, अब कहा जा रहा है कि इसका द्रव्यमान भी प्लूटो से 27 प्रतिशत अधिक है.

एरिस पृथ्वी से 14.5 अरब किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और उसका एक उपग्रह भी है जिसका नाम डिस्नोमिया है.

पिछले वर्ष प्लूटो को ग्रहों की बिरादरी से बेदखल किए जाने के बाद वैज्ञानिकों के बीच ज़ोरदार बहस और विवादों का सिलसिला चला था.