सोमवार, 30 अप्रैल, 2007 को 08:24 GMT तक के समाचार
अमरीकी वैज्ञानिकों ने एक ऐसी दवा तैयार की है जिसे खाने के बाद मोटापे से परेशान लोगों को दौड़ने या जिम में कसरत कर पसीना बहाने की ज़रूरत न पड़े.
यानी शरीर के विभिन्न हिस्सों में जमी अनावश्यक चर्बी को गलाने के लिए अब दौड़-भाग, व्यायाम, योग और तरह-तरह के नुस्खों की नहीं, बल्कि 'गोली' की दरकार होगी.
दरअसल, वैज्ञानिकों ने 'जिम पिल' दवा से चर्बी गलाने का प्रयोग चूहों पर किया और यह काफ़ी सफल रहा.
उच्चा वसायुक्त भोजन दिए जाने और ज़्यादा उछल-कूद न करने के बावजूद इस दवा के प्रभाव में चूहों का वजन नहीं बढ़ा.
इस दवा का इस्तेमाल मोटापाजनित बीमारियों मसलन मधुमेह यानी डायबिटीज़ के इलाज के लिए हो सकेगा.
शॉक इंस्टीट्यूट की टीम ने अपने इस प्रयोग को एक्सपेरिमेंटल बायोलॉजी 2007 में प्रस्तुत किया है.
यह दवा शरीर में मौजूद चर्बी से रासायनिक क्रिया के बाद पीपीएआर डेल्टा नामक जीन बनाती है.
इसके बाद चर्बी गलने की प्रक्रिया ठीक उसी तरह शुरू हो जाती है, जैसा कि व्यायाम करने से होता है.
मानव परीक्षण
शोधकर्ता डॉ रोनाल्ड इवांस को यकीन है कि इस दवा का प्रभाव मनुष्यों में भी इसी तरह होगा.
ब्रिटेन के ऑक्सफ़ोर्ड सेंटर फॉर डायबिटीज़ के विशेषज्ञ डॉ फ़्रेडरिक कार्पे ने उम्मीद जताई है कि निकट भविष्य में मनुष्यों पर इसका प्रयोग हो सकेगा.
शोध की अहमियत बताते हुए उन्होंने कहा, "इससे पहले कभी भी वसा को गलाने के लिए दवा तैयार नहीं हुई थी."
लेकिन कार्पे ने सावधान भी किया, "भले ही यह गोली व्यायाम के विकल्प के रूप में इस्तेमाल हो सकती है, लेकिन ऐसा नहीं लगता कि शारीरिक व्यायाम के दूसरे फ़ायदे होते हैं, वो इस गोली से नहीं मिलेंगे."