मंगलवार, 10 अप्रैल, 2007 को 02:32 GMT तक के समाचार
वैज्ञानिकों का कहना है कि बर्फ़ीले इलाक़ों में पेड़ लगाने से पृथ्वी के तापमान में और वृद्धि हो सकती है क्योंकि पेड़ गरमी को परावर्तित नहीं होने देतीं.
अमरीकी शोधकर्ताओं का मानना है कि बर्फ़ीले इलाक़ों में पेड़ों के काटे जाने से पृथ्वी के बढ़ते तापमान को रोकने की कोशिशों में मदद मिल सकती है.
यह शोध नेशनल एकेडमी ऑफ़ साइंसेस में प्रकाशित हुआ है और इसमें पर्यावरण की इस जटिलता को उजागर किया गया है.
अभी तक यह माना जाता रहा है कि पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से दुनिया के तापमान में वृद्धि हो रही है.
दरअसल पेड़ों की पत्तियाँ कार्बन डाइऑक्साइड जैसी ग्रीन हाउस गैसों को वातावरण से हटा देती हैं.
लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि रूस, यूरोप और कनाडा के बर्फ़ीले इलाक़ों के पेड़ों की पत्तियाँ बर्फ़ को ढक लेती है जिससे वह इसे परावर्तित नहीं कर पाती हैं.
इससे पृथ्वी पर सूरज की रोशनी का अधिक अवशोषण होता है. हालांकि वैज्ञानिकों ने इससे बचने के लिए पेड़ों को काटे जाने को नहीं कहा है.
उल्लेखनीय है कि हाल में जलवायु परिवर्तन पर जारी एक अहम रिपोर्ट में कहा गया है कि इसकी वजह से करोड़ों लोगों को पानी नहीं मिलेगा, फसलें चौपट हो जाएँगीं और बीमारियाँ फैलेंगी.
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन के परिणाम पूरी दुनिया में दिखाई देने लगे हैं. रिपोर्ट में एक धुँधले भविष्य की तस्वीर दिखाई गई है.
इसके अनुसार भविष्य में पानी की किल्लत होगी. साथ ही बाढ़ एक सामान्य समस्या होगी, बीमारियाँ तेज़ी से बढ़ेंगी.
इसके अनुसार फसलों में लगातार कमी आएगी और लाखों लोग भूखे रहेंगे.
इसमें कहा गया है कि दोनों ध्रुव, अफ़्रीका, एशिया और प्रशांत महासागर के छोटे द्वीप इसके निशाने पर होंगे.