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चीन में 'तेज़ी से फैल रहा है सिफलिस'

एक नई रिपोर्ट के अनुसार चीन में यौन संक्रमित रोग सिफलिस के मामले काफ़ी तेज़ी से बढ़ रहे हैं.

मेडिकल जर्नल 'द लैनसेट' के अनुसार चीन ने 60 और 70 के दशक में इस रोग को अपने यहाँ से क़रीब-क़रीब पूरी तरह से ख़त्म कर दिया था लेकिन अब तेज़ी से इसकी वापसी चिंताजनक है.

रिपोर्ट के अनुसार 1993 में एक लाख लोगों में से इस रोग के 0.2 मामले थे लेकिन 2005 में यह बढ़कर 5.7 हो गया.

रिपोर्ट के एक लेखक के अनुसार स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप ज़रूरी है.

इस अध्ययन रिपोर्ट को तैयार करने वाले दल में यौन संक्रमित रोगों के नियंत्रण के लिए काम करने वाले चीन के नेशनल सेंटर और नॉर्थ कैरोलिना यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ़ मेडिसिन के डॉक्टर भी शामिल थे.

रिपोर्ट के सह-लेखक मैरून कोहेन के अनुसार यह रोग काफ़ी तेज़ी से फैल रहा है.

'एचआईवी भी फैलेगा'

यौनकर्मियों और पुरुष समलैंगिकों में इसके मामले ज़्यादा देखने को मिल रहे हैं.

चीन के कुछ शीर्ष विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के समूहों में दस से बीस प्रतिशत लोगों को सिफलिस की बीमारी देखने को मिली है.

आम लोगों में भी यह बीमारी तेज़ी से फैल रही है. सबसे चिंता वाली बात यह है कि माँ से बीमारी नवजात बच्चों में भी आ रही है.

रिपोर्ट के अनुसार चीन में हर वर्ष तीन हज़ार 400 नवजात बच्चे सिफलिस बीमारी के साथ ही पैदा हो रहे हैं. वर्ष 1991 से हर वर्ष इस आँकड़े में 70 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो रही है.

डॉक्टर कोहेन कहते हैं, ''सिफलिस अपने आप में तो एक ख़तरनाक और घातक बीमारी है ही यह दूसरे यौन संक्रमित रोगों को भी फैलाने में मदद करता है.''

उन्होंने बीबीसी को बताया, '' जब हम सिफलिस के मामले बढ़ते देखते हैं तो यह सोचकर चिंतित हो जाते हैं कि दूसरे यौन संक्रमित रोग भी फैल रहे हैं. ''

डॉक्टर कोहेन ने कहा, '' हमारे पास यह मानने की भी वजह है कि सिफलिस एचआईवी फैलाने में भी मदद करता है. हम इसलिए चिंतित हैं कि इलाज न होने पर सिफलिस एचआईवी में तब्दील हो जाएंगे. ''