सोमवार, 08 जनवरी, 2007 को 02:52 GMT तक के समाचार
वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने स्टेम सेल के नए स्रोत की खोज की है जिससे आने वाले दिनों में क्षतिग्रस्त मानव अंगों को ठीक किया जा सकेगा.
हार्वर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने कहा है कि उन्होंने उस द्रव्य पदार्थ से स्टेम सेल हासिल करने में सफलता पाई है जो गर्भ में बच्चे के आसपास रहता है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस खोज से मधुमेह या डायबिटीज़, पार्किन्सन्स और अल्ज़ाइमर्स जैसे रोगों के इलाज की उम्मीद जागती है.
उनका कहना है कि यह स्टेम सेल मूल स्टेम सेल की तरह बर्ताव करता है और उन कोशिकाओं का फिर से निर्माण कर सकता है जो बीमारी के कारण क्षतिग्रस्त हो गए हों.
वैक फ़ॉरेस्ट यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ़ मेडिसिन के वैज्ञानिकों ने एक साइंस जर्नल में कहा है कि उन्होंने इस स्टेम सेल को माँसपेशियों, चर्बी, धमनी और शिरा और लीवर की कोशिकाओं में तब्दील करने में सफलता पाई है.
हालांकि यह स्टेम सेल संख्या में बहुत कम होते हैं लेकिन अपने आपको विकसित करने की जो क्षमता इनके भीतर पाई गई है, उसने बड़ी उम्मीद जताई है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि इस तरह के स्टेम सेल के एक लाख नमूने इकट्ठे कर लिए जाएँ तो यह अमरीका की 99 प्रतिशत आबादी के काम आ सकता है.
इससे पहले मानव भ्रूण से स्टेम सेल हासिल करने की प्रक्रिया को लेकर विवाद चल रहा था और इस नए खोज से वह विवाद ख़त्म हो सकेगा.
विवाद इसलिए था क्योंकि स्टेम सेल हासिल करने की प्रक्रिया में भ्रूण नष्ट हो जाता है.